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34 साल से मानव सेवा की मिसाल बनी प्याऊ, वीडियो में देंखे दंपति बिना वेतन राहगीरों को पिला रहे शीतल जल

 

करौली जिले के कैला देवी मार्ग पर स्थित वामनपुरा गांव में एक छोटी सी प्याऊ पिछले 34 वर्षों से मानव सेवा की अनोखी मिसाल पेश कर रही है। यह प्याऊ काछीपुरा निवासी बृजमोहन माली और उनकी पत्नी कल्याणी देवी द्वारा वर्ष 1992 से लगातार संचालित की जा रही है, जहां वे राहगीरों और श्रद्धालुओं को निःस्वार्थ भाव से शीतल जल उपलब्ध करा रहे हैं।

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इस सेवा कार्य की खास बात यह है कि इसके लिए दंपति ने अपना नियमित रोजगार तक छोड़ दिया, लेकिन सेवा भाव को कभी नहीं छोड़ा। आज भी वे बिना किसी आर्थिक सहायता और सरकारी सहयोग के इस प्याऊ को संचालित कर रहे हैं और आने-जाने वाले लोगों की प्यास बुझा रहे हैं।

बृजमोहन माली बताते हैं कि इस सेवा की शुरुआत वर्ष 1992 में एक साधारण घटना से हुई थी। उस समय वे खनन क्षेत्र में मजदूरी का काम करते थे। एक दिन दोपहर में काम से लौटते समय उन्होंने वामनपुरा के पास एक बुजुर्ग दंपती को गर्मी और पानी की कमी के बीच भोजन करते हुए देखा। इस दौरान जब बातचीत हुई तो बुजुर्गों ने बताया कि उस क्षेत्र में पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं है।

यह बात बृजमोहन माली के मन को गहराई से छू गई। उन्होंने तुरंत पास के कुएं से पानी लाकर उन बुजुर्गों को पिलाया। इसी पल ने उनके जीवन की दिशा बदल दी और उन्होंने वहीं पर लोगों की सेवा करने का संकल्प ले लिया।

इसके बाद उन्होंने अपनी पत्नी के साथ मिलकर उसी स्थान पर एक प्याऊ स्थापित की, जो धीरे-धीरे स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के लिए राहत का केंद्र बन गई। कैला देवी मंदिर मार्ग होने के कारण यहां हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु और यात्री गुजरते हैं, जिन्हें यह प्याऊ राहत प्रदान करती है।

समय के साथ यह छोटा प्रयास एक मजबूत सेवा परंपरा में बदल गया, जो आज भी बिना रुके जारी है। गर्मी के मौसम में यह प्याऊ राहगीरों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।स्थानीय लोग इस दंपति की सेवा भावना की सराहना करते हैं और उन्हें समाज के लिए प्रेरणास्रोत मानते हैं। बिना किसी स्वार्थ के 34 वर्षों से लगातार चल रही यह सेवा निस्वार्थ मानवता की एक जीवंत मिसाल बन चुकी है।