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16 साल पूजन के लिए इंतजार, वीडियो में देखें राजस्थान के इस मंदिर में शारदीय नवरात्र के लिए 27 साल बाद आएगा नंबर

 

धार्मिक आस्था और भक्तों की अटूट श्रद्धा का अनोखा उदाहरण राजस्थान के एक मंदिर में देखने को मिल रहा है, जहां पूजन के लिए भक्तों को 16 साल तक इंतजार करना पड़ता है। इतना ही नहीं, शारदीय नवरात्र में विशेष पूजन के लिए 27 साल बाद ही नंबर आता है।

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यह मंदिर कोई आम मंदिर नहीं, बल्कि महिषासुर मर्दिनी माता का दिव्य धाम है, जिसके बारे में मान्यता है कि देवी स्वयं पहाड़ चीरकर प्रकट हुई थीं। इस चमत्कारी स्थल पर पूजा-अर्चना करने की इच्छा रखने वाले भक्तों की लंबी सूची बनी हुई है।

मंदिर का इतिहास और मान्यता

महिषासुर मर्दिनी मंदिर को लेकर कई धार्मिक कथाएं प्रचलित हैं। मंदिर के पुजारी बताते हैं कि प्राचीन काल में इस स्थान पर मां दुर्गा ने महिषासुर राक्षस का संहार किया था। यही कारण है कि यहां भक्तों की अपार श्रद्धा देखने को मिलती है।

कहा जाता है कि मंदिर का निर्माण सैकड़ों साल पहले पहाड़ों को काटकर किया गया था, और आज भी इस मंदिर की अद्भुत संरचना और प्राकृतिक सौंदर्य देखने लायक है।

पूजन के लिए लंबी प्रतीक्षा सूची

  • चैत्र नवरात्र और शारदीय नवरात्र में विशेष पूजन के लिए भक्तों को 16 साल तक इंतजार करना पड़ता है।

  • वहीं, शारदीय नवरात्र में मुख्य पूजन के लिए 27 साल बाद नंबर आता है।

  • भक्तों की आस्था इतनी गहरी है कि वे सालों तक इंतजार करने को भी तैयार रहते हैं।

मंदिर के प्रमुख पुजारी के अनुसार, "इस मंदिर में पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यही कारण है कि यहां हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं, लेकिन मुख्य पूजन करने के लिए लंबी प्रतीक्षा सूची में नाम दर्ज कराना पड़ता है।"

नवरात्रों में विशेष आयोजन

हर साल चैत्र और शारदीय नवरात्र में यहां भव्य आयोजन होते हैं। नवरात्र के दौरान मंदिर में विशेष हवन, महाआरती और भंडारे का आयोजन किया जाता है। देशभर से भक्तजन यहां मां के दर्शन करने पहुंचते हैं, लेकिन पूजा-अर्चना के लिए तय नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है।

भक्तों की अपार श्रद्धा

यह मंदिर राजस्थान के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है और यहां आने वाले श्रद्धालु अपनी बारी के लिए दशकों तक इंतजार करते हैं। भक्तों का मानना है कि यहां सच्चे मन से की गई पूजा कभी व्यर्थ नहीं जाती।

मंदिर प्रशासन की तैयारी

बढ़ती भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने ऑनलाइन बुकिंग और वेटिंग लिस्ट की सुविधा शुरू की है। इसके अलावा, यात्रियों की सुविधा के लिए धर्मशालाएं और रुकने की व्यवस्था भी की गई है।