जोधपुर केंद्रीय कारागृह में विचाराधीन बंदी की मौत को न्यायिक जांच ने हत्या माना, जेल प्रशासन का हार्ट अटैक दावा खारिज
केंद्रीय कारागृह जोधपुर में विचाराधीन बंदी रूपाराम की मौत को लेकर न्यायिक जांच ने गंभीर खुलासे किए हैं। जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि रूपाराम की मौत हत्या के कारण हुई थी, और उसके सिर और गर्दन पर लगी गंभीर चोटें मौत का प्रमुख कारण रही हैं। इससे पहले जेल प्रशासन ने उसकी मौत को हार्ट अटैक से हुई मानते हुए बताया था, लेकिन यह दावा मेडिकल रिपोर्ट और जांच के साक्ष्यों से पूरी तरह खारिज हो गया।
जिला प्रशासन ने बताया कि न्यायिक जांच में रूपाराम के शरीर पर मिले चोटों का विस्तार से परीक्षण किया गया। जांच टीम ने कहा कि सिर और गर्दन पर लगी चोटें सामान्य दुर्घटना या खुद से होने वाली चोटों से संभव नहीं हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि उसे जानबूझकर घायल किया गया था।
जेल अधिकारियों ने शुरुआत में रूपाराम की मौत को प्राकृतिक कारणों से हुई बताने की कोशिश की थी। प्रशासन ने दावा किया था कि बंदी की अचानक तबीयत बिगड़ने से उसे हार्ट अटैक आया। लेकिन न्यायिक जांच के दौरान मेडिकल साक्ष्यों और जेल सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल से यह स्पष्ट हुआ कि हार्ट अटैक का कोई भी प्रमाण नहीं मिला।
जांच में यह भी सामने आया कि जेल में सुरक्षा व्यवस्था में कई लापरवाहियां पाई गई हैं। अधिकारी और स्टाफ समय पर निगरानी नहीं कर पाए, जिससे बंदी को चोट पहुँचाई जा सकी। अब इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
वकील और मानवाधिकार संगठन इस मामले को गंभीर मान रहे हैं। उनका कहना है कि जेल में बंदियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि किसी बंदी के साथ हिंसा होती है, तो इसका सीधा असर न्याय व्यवस्था और मानवाधिकारों पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों में पारदर्शी और कड़ी जांच होना अनिवार्य है, ताकि दोषियों को सजा मिल सके।
इस घटना ने राज्य में जेल सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कारागृह में बंदियों की सुरक्षा और निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक और कड़ी कार्रवाई आवश्यक है। इसके साथ ही जेल कर्मचारियों को मानवीय और नैतिक जिम्मेदारी के प्रति सजग रहना होगा।
रूपाराम की मौत के बाद परिवार और समाज में भारी आक्रोश देखा गया। न्यायिक जांच ने अब हत्या की पुष्टि कर दी है, जिससे इस मामले में नए मोड़ की संभावना बढ़ गई है। प्रशासन ने कहा है कि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई जल्द शुरू की जाएगी।
राज्य सरकार ने भी मामले को गंभीरता से लिया है और जेलों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
इस घटना ने जेलों में बंदियों की सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही पर ध्यान आकर्षित किया है। रूपाराम की मौत सिर्फ एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं है, बल्कि यह जेल प्रशासन और न्याय व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी भी है।