प्रख्यात कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा का निधन, पैतृक गांव परेऊ में शोक की लहर
प्रख्यात कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा का बुधवार को जोधपुर के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। उनके निधन की खबर आते ही उनके पैतृक गांव परेऊ में मातम छा गया। गुरुवार शाम उनकी पार्थिव देह जब गांव पहुंची, तो ग्रामीणों और उनके अनुयायियों की भारी भीड़ ने उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए जगह-जगह जमा होकर भावपूर्ण नमन किया।
साध्वी प्रेम बाईसा ने अपने जीवन में समाज और संस्कृति के क्षेत्र में अपार योगदान दिया। उनके कथावाचन में धार्मिक और नैतिक शिक्षा के साथ-साथ समाजिक जागरूकता की भी झलक मिलती थी। राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में उनके कथाओं और प्रवचनों ने लोगों को जीवन के मूल्यों और आध्यात्मिक शिक्षाओं से अवगत कराया। उनका सरल और मार्मिक अंदाज उन्हें श्रोताओं के बीच अत्यंत लोकप्रिय बनाता था।
गांव परेऊ में गुरुवार को साध्वी प्रेम बाईसा की पार्थिव देह के स्वागत के समय भावभीनी दृश्य देखने को मिले। ग्रामीणों ने फूलों और दीपों से उनका स्वागत किया। कई लोग अपनी आंखों में आंसू लेकर उन्हें अंतिम बार देखने के लिए कतार में खड़े रहे। वहीं अनुयायियों ने उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की और उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी।
स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने भी इस दौरान व्यवस्था बनाए रखी। सूचना के अनुसार, उनके अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भारी भीड़ जमा हुई, जिससे सुरक्षा के लिहाज से विशेष इंतजाम किए गए। ग्रामीण और भक्त दोनों ही उनकी आत्मा की शांति की प्रार्थना करते रहे।
साध्वी प्रेम बाईसा का जीवन अत्यंत प्रेरणादायक था। उन्होंने न केवल कथावाचन के माध्यम से लोगों को धार्मिक और नैतिक शिक्षा दी, बल्कि समाज में महिला सशक्तिकरण और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में भी कई प्रयास किए। उनके द्वारा आयोजित कथा समारोह और प्रवचन अब भी लोगों के दिलों में जीवित हैं। उनके निधन से राजस्थान के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक क्षेत्र में अपूरणीय क्षति हुई है।
उनके अनुयायियों का कहना है कि साध्वी प्रेम बाईसा का सरल और सहज अंदाज उनके श्रोताओं के दिलों में हमेशा जीवित रहेगा। उनके प्रवचनों में जीवन की सच्चाइयों और धार्मिक मूल्यों को इस तरह प्रस्तुत किया जाता था कि हर उम्र के लोग उसे आसानी से समझ और आत्मसात कर सकते थे। उनका निधन केवल उनके परिवार और गांव के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक बड़ी क्षति है।
गांव परेऊ में गुरुवार शाम को उनके अंतिम दर्शन के बाद अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। प्रशासन और परिवार ने सभी आवश्यक इंतजाम किए हैं ताकि श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों को किसी तरह की परेशानी न हो।
साध्वी प्रेम बाईसा की यादें और उनका योगदान हमेशा समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा। उनके कथावाचन और प्रवचन लोगों के जीवन में आध्यात्मिक चेतना और नैतिक मूल्यों को स्थापित करते रहेंगे। उनके निधन से न केवल उनका परिवार और गांव, बल्कि पूरी राजस्थान संस्कृति के प्रेमियों को अपूरणीय दुख हुआ है।