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राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: किन्नर समुदाय को OBC सूची में शामिल करने पर सवाल, सरकार को नई नीति बनाने के निर्देश

 

राजस्थान में ट्रांसजेंडर (किन्नर) समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) सूची में शामिल करने से जुड़ा मामला अब न्यायिक हस्तक्षेप के बाद नए मोड़ पर पहुंच गया है। Rajasthan High Court की जोधपुर मुख्यपीठ ने राज्य सरकार की इस कार्रवाई को “महज दिखावा” और “आंखों में धूल झोंकने जैसा कदम” करार दिया है।हाईकोर्ट की खंडपीठ, जिसमें जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित शामिल थे, ने 12 जनवरी 2023 की उस अधिसूचना पर सख्त टिप्पणी की है, जिसके तहत किन्नर समुदाय को OBC सूची के क्रमांक 92 पर शामिल किया गया था।

सरकार की अधिसूचना पर अदालत की सख्त टिप्पणी

अदालत ने अपने हालिया रिपोर्टेबल निर्णय में कहा कि केवल सूची में नाम जोड़ देना वास्तविक सामाजिक और आर्थिक लाभ सुनिश्चित नहीं करता। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह कदम “प्रभावी नीति के बजाय प्रतीकात्मक कार्रवाई” जैसा प्रतीत होता है, जिससे समुदाय को वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा है।खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रांसजेंडर समुदाय लंबे समय से शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है, और ऐसे में केवल नाममात्र की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है।

नई नीति बनाने के निर्देश

कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि जब तक इस मुद्दे पर एक समग्र और प्रभावी नीति तैयार नहीं की जाती, तब तक ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों को सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के दौरान 3 प्रतिशत अतिरिक्त अंक भार (additional weightage) दिया जाए।अदालत का मानना है कि यह अस्थायी व्यवस्था तब तक लागू रहनी चाहिए जब तक समुदाय के लिए वास्तविक आरक्षण और कल्याणकारी ढांचा तैयार नहीं हो जाता।

सामाजिक न्याय और समान अवसर पर जोर

अदालत ने अपने फैसले में इस बात पर भी जोर दिया कि समान अवसर प्रदान करना केवल संवैधानिक दायित्व नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय का मूल आधार है। ट्रांसजेंडर समुदाय को मुख्यधारा में लाने के लिए ठोस नीतिगत कदम आवश्यक हैं, न कि केवल औपचारिक घोषणाएं।विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला सामाजिक समावेशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है, क्योंकि यह सरकार को नीतिगत स्तर पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर करता है।

ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए संभावित असर

इस निर्णय के बाद ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों को शिक्षा और सरकारी नौकरी में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, स्थायी समाधान के लिए राज्य सरकार को विस्तृत नीति तैयार करनी होगी, जिसमें आरक्षण, स्किल डेवलपमेंट और सामाजिक सुरक्षा जैसे पहलुओं को शामिल करना होगा।