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राजस्थान हाईकोर्ट की नई पहल: दो मिनट के वीडियो में जाने खर्चों में कटौती और ईंधन बचत के लिए तीन दिन वर्चुअल सुनवाई का फैसला

 

राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन ने अदालत के कामकाज के दौरान होने वाले खर्चों में कटौती और पेट्रोल-डीजल की बचत को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इसके तहत कुछ दिनों के लिए मुकदमों की सुनवाई को वर्चुअल माध्यम से आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल चंचल मिश्रा की ओर से बुधवार को इस संबंध में आधिकारिक नोटिस जारी किया गया। नोटिस में बताया गया है कि एक प्रारंभिक पहल के रूप में 22, 26 और 27 मई को अदालत में सूचीबद्ध मामलों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की जाएगी।

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इस निर्णय का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया को बाधित किए बिना संसाधनों की बचत करना और प्रशासनिक खर्चों को नियंत्रित करना है। अदालत प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था फिलहाल एक प्रयोगात्मक कदम के तौर पर लागू की जा रही है।यह पहल भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) द्वारा 12 मई को जारी किए गए मेमोरेंडम और सुप्रीम कोर्ट द्वारा 15 मई को जारी सर्कुलर के बाद की गई है। इन निर्देशों में सरकारी कामकाज में दक्षता बढ़ाने और अनावश्यक खर्चों को कम करने पर जोर दिया गया था।

हाईकोर्ट प्रशासन का मानना है कि डिजिटल माध्यम से सुनवाई करने से न केवल ईंधन और यात्रा खर्च में कमी आएगी, बल्कि समय की भी बचत होगी और न्यायिक प्रक्रिया अधिक सुगम बन सकेगी।हालांकि, इस व्यवस्था के दौरान यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पक्षकारों और अधिवक्ताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो और सुनवाई की पारदर्शिता तथा निष्पक्षता बनी रहे।

फिलहाल यह कदम शुरुआती चरण में लागू किया गया है और इसके परिणामों का मूल्यांकन करने के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी। न्यायिक व्यवस्था में तकनीक के बढ़ते उपयोग के बीच इसे एक महत्वपूर्ण सुधारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है।