जोधपुर में सियासी हंगामा, कांग्रेस विधायक अभिमन्यु पूनिया ने SDM के मुंह पर फाड़ा ज्ञापन, वीडियो वायरल
राजस्थान के जोधपुर में मंगलवार को उस समय सियासी हंगामा खड़ा हो गया, जब कांग्रेस विधायक और यूथ कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष अभिमन्यु पूनिया ने एसडीएम पंकज जैन के मुंह पर ज्ञापन फाड़कर फेंक दिया। यह घटना युवक कांग्रेस द्वारा निकाली गई ‘मनरेगा बचाओ महासंग्राम पदयात्रा’ के दौरान हुई, जिसने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में तीखी चर्चा को जन्म दे दिया है।
दरअसल, मंगलवार दोपहर करीब 1 बजे यूथ कांग्रेस की ओर से जोधपुर में राजीव गांधी सर्किल, नई सड़क से जिला कलेक्टर कार्यालय तक पैदल यात्रा निकाली गई। इस पदयात्रा में बड़ी संख्या में युवक कांग्रेस के कार्यकर्ता शामिल हुए। पदयात्रा का नेतृत्व यूथ कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष और हनुमानगढ़ जिले की संगरिया विधानसभा से विधायक अभिमन्यु पूनिया कर रहे थे। यात्रा का उद्देश्य मनरेगा योजना में कथित कटौती और श्रमिकों की समस्याओं को लेकर सरकार और प्रशासन का ध्यान आकर्षित करना था।
पदयात्रा जब जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंची, तो वहां माहौल तनावपूर्ण हो गया। युवक कांग्रेस के कार्यकर्ता जिला कलेक्टर और अतिरिक्त कलेक्टर को गेट पर ही आकर ज्ञापन लेने की मांग पर अड़ गए। कार्यकर्ताओं का कहना था कि मनरेगा से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रशासन गंभीर नहीं है और जनप्रतिनिधियों की बातों को अनदेखा किया जा रहा है।
इसी दौरान मौके पर एसडीएम पंकज जैन पहुंचे और कार्यकर्ताओं से ज्ञापन लेने की बात कही। लेकिन युवक कांग्रेस के नेता कलेक्टर या अतिरिक्त कलेक्टर को ही ज्ञापन सौंपने की मांग पर अड़े रहे। इसी बात को लेकर कहासुनी तेज हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बहस बढ़ने के दौरान विधायक अभिमन्यु पूनिया काफी आक्रोशित हो गए और उन्होंने एसडीएम पंकज जैन के हाथ में दिया गया ज्ञापन उनके मुंह के सामने ही फाड़कर फेंक दिया।
इस घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस बल तुरंत हरकत में आए और स्थिति को संभालने की कोशिश की। युवक कांग्रेस के कार्यकर्ता भी अपने नेता के समर्थन में नारेबाजी करने लगे। कुछ देर के लिए कलेक्टर कार्यालय के बाहर तनाव का माहौल बना रहा।
घटना को लेकर कांग्रेस और प्रशासन के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि प्रशासन जनप्रतिनिधियों और आम जनता की बात सुनने को तैयार नहीं है, जिससे आक्रोश बढ़ रहा है। वहीं प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि ज्ञापन लेने की प्रक्रिया तय नियमों के तहत होती है और इस तरह का व्यवहार निंदनीय है।
इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिस पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। विपक्षी दलों ने कांग्रेस विधायक के व्यवहार की आलोचना करते हुए इसे प्रशासनिक गरिमा के खिलाफ बताया है। वहीं कांग्रेस समर्थकों का कहना है कि यह गुस्सा जनता के हक की लड़ाई का प्रतीक है।
फिलहाल प्रशासन ने मामले की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजने की बात कही है। जोधपुर की इस घटना ने एक बार फिर राजनीतिक आंदोलनों और प्रशासनिक संवाद के तरीकों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।