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वीडियो में देखें जोधपुर में 12 साल बाद बाल विवाह से मिली मुक्ति, कोर्ट ने शादी को किया निरस्त

 

राजस्थान के जोधपुर में बाल विवाह से जुड़े एक ऐतिहासिक मामले में 20 वर्षीय युवती को आखिरकार कानूनी रूप से आजादी मिल गई। जोधपुर के पारिवारिक न्यायालय संख्या-2 ने उसके बाल विवाह को निरस्त करने का आदेश जारी किया है, जिससे उसका 12 साल पुराना कानूनी और सामाजिक बंधन समाप्त हो गया।

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Jodhpur की रहने वाली इस युवती का विवाह मात्र 9 वर्ष की उम्र में वर्ष 2015 में समाज के दबाव में एक ग्रामीण क्षेत्र में कर दिया गया था। उस समय वह नाबालिग थी और उसे इस विवाह की पूरी समझ भी नहीं थी।

अब 20 वर्षीय यह युवती बीए प्रथम वर्ष की छात्रा है और उसने वर्षों तक इस विवाह को स्वीकार नहीं किया। बड़े होने के बाद उसने अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाई और इस शादी को कानूनी रूप से चुनौती दी।

मामले की सुनवाई करते हुए Varun Talwar ने बाल विवाह को निरस्त घोषित किया। अदालत के इस फैसले के बाद युवती को कानूनी रूप से इस बंधन से मुक्ति मिल गई। युवती ने बताया कि बचपन में जबरन हुई इस शादी की बेड़ियां उसे कभी स्वीकार नहीं थीं। उसने कहा कि Kriti Bharti की मदद से उसने हिम्मत जुटाई और अपने अधिकारों के लिए लड़ने का निर्णय लिया।

कृति भारती, जो Saarthi Trust की मैनेजिंग ट्रस्टी और चाइल्ड वूमेन राइट्स एडवोकेट हैं, लंबे समय से बाल विवाह उन्मूलन की दिशा में काम कर रही हैं। उनकी मदद से युवती ने लगभग सवा साल पहले पारिवारिक न्यायालय में वाद दायर किया था।

कोर्ट के फैसले के बाद युवती ने कहा कि अब वह अपने भविष्य को संवारने पर ध्यान देगी और अपनी पढ़ाई पूरी कर एक बेहतर जीवन बनाना चाहती है। यह मामला न केवल एक व्यक्तिगत जीत है, बल्कि बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा के खिलाफ कानूनी और सामाजिक जागरूकता का भी महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे फैसले अन्य पीड़ितों को भी आगे आने और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने की प्रेरणा देंगे।