गणगौर उत्सव की धूम: महिलाओं ने ईसर-गौरा की पूजा कर निभाई परंपरा
कस्बे सहित ग्रामीण क्षेत्रों में गणगौर उत्सव पूरे उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। इस दौरान महिलाएं माता गौरी और भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना कर रही हैं।
परंपरागत रीति-रिवाजों के तहत महिलाएं हरी घास की रंग-बिरंगी झारियां सजाकर उत्सव की तैयारियों में जुटी हुई हैं। घर-घर में पारंपरिक गीतों की गूंज सुनाई दे रही है, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया है।
महिलाएं सज-धज कर ईसर-गौरा की मूर्तियों को सजा रही हैं और विधि-विधान से पूजा कर रही हैं। व्रत रखकर वे भजन, लोकगीत और पारंपरिक नृत्य में भाग ले रही हैं। खासतौर पर युवतियों में इस पर्व को लेकर खास उत्साह देखने को मिल रहा है।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, गणगौर उत्सव वैवाहिक सुख और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। अविवाहित युवतियां अच्छे वर की कामना के लिए व्रत रखती हैं, जबकि विवाहित महिलाएं अपने परिवार की खुशहाली और पति की दीर्घायु के लिए पूजा करती हैं।
ग्रामीण इलाकों में इस पर्व की रौनक और भी अधिक देखने को मिल रही है, जहां महिलाएं समूह बनाकर पारंपरिक परिधानों में लोकगीत गाते हुए उत्सव को जीवंत बना रही हैं।
कुल मिलाकर, गणगौर उत्सव के माध्यम से महिलाएं अपनी आस्था, संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखते हुए समाज में एकता और उल्लास का संदेश दे रही हैं।