×

जोधपुर के एमडीएम अस्पताल के नेफ्रोलॉजी वार्ड में आग लगी, वीडियो में जाने AC में शॉर्ट सर्किट से मची अफरा-तफरी

 

जोधपुर के प्रमुख सरकारी अस्पताल मथुरादास माथुर अस्पताल में गुरुवार शाम एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। अस्पताल के नेफ्रोलॉजी वार्ड में लगे एयर कंडीशनर (AC) में अचानक आग लग गई, जिससे वार्ड में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि, अस्पताल स्टाफ की त्वरित सूझबूझ और सतर्कता के कारण स्थिति को जल्द ही नियंत्रण में ले लिया गया और कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।

<a href=https://youtube.com/embed/9HLcBENAgmI?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/9HLcBENAgmI/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden"" style="border: 0px; overflow: hidden;" width="640">

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शाम करीब 5 बजे नेफ्रोलॉजी वार्ड में लगे एक एयर कंडीशनर यूनिट से धुआं निकलने लगा। देखते ही देखते उसमें आग की लपटें उठने लगीं, जिससे मरीजों, तीमारदारों और स्टाफ में हड़कंप मच गया। अस्पताल स्टाफ ने तुरंत बिजली आपूर्ति बंद की और फायर एक्सटिंग्विशर की मदद से आग पर काबू पाया।

अग्निशमन विभाग को सूचना दी गई, लेकिन अस्पताल कर्मचारियों ने समय रहते आग को नियंत्रित कर लिया, जिससे अग्निशमन दल के पहुंचने तक स्थिति सामान्य हो चुकी थी। गनीमत रही कि आग वार्ड के अंदर तक नहीं फैली और किसी भी मरीज या स्टाफ को कोई शारीरिक नुकसान नहीं हुआ।

नेफ्रोलॉजी वार्ड में कई गंभीर मरीज डायलिसिस व अन्य उपचार के लिए भर्ती हैं। ऐसे में अगर आग समय पर नहीं बुझाई जाती, तो एक बड़ी जनहानि की आशंका थी। अस्पताल प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए सभी मरीजों को कुछ समय के लिए अन्य वार्डों में शिफ्ट कर दिया और एसी सिस्टम की तकनीकी जांच शुरू कर दी गई है।

मथुरादास माथुर अस्पताल के अधीक्षक ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया, “यह एक तकनीकी गड़बड़ी थी, जिसमें एयर कंडीशनर के ओवरलोड या वायरिंग में शॉर्ट सर्किट की आशंका है। गहन जांच के आदेश दे दिए गए हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए सभी उपकरणों की सुरक्षा जांच करवाई जाएगी।”

इस घटना ने अस्पतालों में बेसिक फायर सेफ्टी सिस्टम और मेंटेनेंस पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे संस्थानों में बिजली उपकरणों की नियमित जांच और अग्निशमन अभ्यास अनिवार्य किया जाना चाहिए, ताकि किसी भी आपात स्थिति से समय रहते निपटा जा सके।

फिलहाल वार्ड को अस्थायी रूप से बंद कर उसकी मरम्मत की जा रही है। मरीजों को दूसरी सुविधाओं में स्थानांतरित कर उपचार जारी रखा गया है। अस्पताल प्रशासन ने घटना पर खेद जताते हुए भरोसा दिलाया है कि भविष्य में ऐसी किसी भी घटना से बचने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।