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झुंझुनूं में फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा, किरायानामे के जरिए हरियाणा के लोगों को बनाया जा रहा ‘स्थानीय निवासी’, वीडियो में जाने हैवी लाइसेंस जारी करने का मामला सामने आया

 

राजस्थान के झुंझुनूं जिले में एक बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है, जिसमें एक संगठित गिरोह द्वारा कथित रूप से हरियाणा के लोगों को झूठे दस्तावेजों के आधार पर जिले का किरायेदार दिखाया जा रहा है। इसके बाद इन्हीं फर्जी किरायानामों के सहारे परिवहन विभाग से हैवी ड्राइविंग लाइसेंस जारी करवाए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, यह पूरा खेल उप पंजीयक कार्यालय में फर्जी किरायानामों के रजिस्ट्रेशन के जरिए चलाया जा रहा है। आरोप है कि इन दस्तावेजों की उचित जांच-पड़ताल किए बिना ही उन्हें वैध मान लिया जाता है और उसी आधार पर आगे परिवहन विभाग में आवेदन स्वीकार कर लिए जाते हैं।

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जानकारी के मुताबिक, जिन लोगों के नाम पर ये किरायानामे तैयार किए जा रहे हैं, वे सभी हरियाणा राज्य के निवासी हैं। इनमें से किसी का भी झुंझुनूं जिले में न तो कोई व्यवसाय है और न ही नौकरी या स्थायी निवास का कोई वास्तविक आधार। इसके बावजूद उन्हें यहां का किरायेदार दिखाकर स्थानीय निवासी प्रमाणित कर दिया जाता है। इसके बाद यही दस्तावेज परिवहन विभाग में प्रस्तुत कर हैवी व्हीकल ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त कर लिए जाते हैं। यह पूरा मामला सिस्टम की गंभीर लापरवाही और संभावित मिलीभगत की ओर इशारा करता है।

स्थानीय स्तर पर यह मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई है। सवाल यह उठ रहे हैं कि बिना सत्यापन के कैसे रजिस्टर्ड किरायानामों को मान्यता दी जा रही है और कैसे बाहरी लोगों को स्थानीय निवासी के रूप में दर्ज कर सरकारी दस्तावेज जारी किए जा रहे हैं। मामले को लेकर अब जांच की मांग तेज हो गई है। स्थानीय लोगों और जानकारों का कहना है कि यह न केवल दस्तावेजी फर्जीवाड़ा है, बल्कि सड़क सुरक्षा से भी जुड़ा गंभीर मुद्दा है, क्योंकि हैवी ड्राइविंग लाइसेंस बिना सही जांच के जारी किए जा रहे हैं।

फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर मामले की जांच की संभावना जताई जा रही है और संबंधित विभागों से रिकॉर्ड तलब किए जा सकते हैं। अधिकारियों का कहना है कि यदि अनियमितता साबित होती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह मामला एक बार फिर सरकारी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और सख्त सत्यापन प्रणाली की जरूरत को उजागर करता है।