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मनरेगा में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर: फर्जी हस्ताक्षर से मस्टररोल जारी करने का आरोप, जांच में कागज और जमीन का फर्क आया सामने

 

राजस्थान के झालावाड़ जिले के गंगधार क्षेत्र स्थित ग्राम पंचायत गुराड़िया झाला में मनरेगा कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। आरोप है कि पंचायत स्तर पर फर्जी दस्तावेजों और जाली हस्ताक्षरों के जरिए सरकारी धन के दुरुपयोग की कोशिश की गई। इस पूरे मामले ने ग्रामीण विकास योजनाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोप है कि ग्राम पंचायत में मस्टररोल (हाजिरी रजिस्टर) में फर्जी तरीके से मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की गई। बताया जा रहा है कि सरपंच की ओर से ग्राम सचिव के फर्जी हस्ताक्षर कर कई मस्टररोल जारी किए गए, जिनके आधार पर मजदूरी भुगतान का दावा किया गया। कागजों में दर्ज मजदूरों की संख्या और वास्तविक स्थिति में भारी अंतर पाया गया।

यह पूरा मामला तब सामने आया जब ग्राम सचिव ने स्वयं मौके पर जाकर मनरेगा कार्यों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जो स्थिति सामने आई, वह रिकॉर्ड में दर्ज आंकड़ों से बिल्कुल विपरीत थी। मौके पर कई मजदूर अनुपस्थित पाए गए, जबकि दस्तावेजों में उनकी उपस्थिति दर्ज थी। इस विसंगति ने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए।

सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि मस्टररोल में हेराफेरी कर सरकारी धन के भुगतान की प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया गया। आरोपों के मुताबिक, बिना वास्तविक कार्य और श्रमिकों की उपस्थिति के ही भुगतान निकालने की तैयारी की जा रही थी।

गांव में इस खुलासे के बाद ग्रामीणों में भी चर्चा तेज हो गई है। कई स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि इस तरह की अनियमितताएं सही साबित होती हैं, तो यह सीधे तौर पर ग्रामीण विकास योजनाओं की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाएगा।

प्रशासनिक स्तर पर भी मामला सामने आने के बाद जांच प्रक्रिया शुरू किए जाने की संभावना जताई जा रही है। संबंधित विभाग द्वारा दस्तावेजों की जांच, मस्टररोल की सत्यता और भुगतान प्रक्रिया की विस्तृत समीक्षा की जा सकती है। साथ ही, यह भी देखा जाएगा कि इस कथित गड़बड़ी में किन-किन स्तरों पर लापरवाही या मिलीभगत हुई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि मनरेगा जैसी योजनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं, लेकिन यदि इनके क्रियान्वयन में पारदर्शिता नहीं रहती, तो इसका सीधा असर जरूरतमंद लोगों तक पहुंचने वाले लाभ पर पड़ता है।

फिलहाल, मामले की जांच जारी रहने की बात कही जा रही है और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यदि आरोप साबित होते हैं, तो इसमें शामिल जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।