झालावाड़ में अरावली संरक्षण को लेकर उठी आवाज, पर्यावरणविदों और आदिवासी नेताओं ने जताई चिंता
झालावाड़ में अरावली विरासत जन अभियान के बैनर तले देशभर से जुटे पर्यावरणविदों, आदिवासी नेताओं और प्रकृति प्रेमियों ने अरावली पर्वतमाला के संरक्षण को लेकर गंभीर चिंता जताई है।अभियान से जुड़े लोगों ने अरावली क्षेत्र की सुरक्षा, पर्यावरण संतुलन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पर्यावरण मंत्रालय के दस्तावेजों में राजस्थान के झालावाड़ सहित कई क्षेत्रों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
अरावली संरक्षण की मांग
पर्यावरणविदों का कहना है कि अरावली पर्वतमाला केवल पहाड़ियों की श्रृंखला नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके संरक्षण से जल स्रोतों, जैव विविधता और स्थानीय पारिस्थितिकी को बचाने में मदद मिलेगी।उन्होंने सरकार से अरावली क्षेत्र की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।
आदिवासी नेताओं ने भी रखी बात
कार्यक्रम में शामिल आदिवासी नेताओं ने कहा कि अरावली क्षेत्र से स्थानीय समुदायों का गहरा जुड़ाव है। यहां की प्राकृतिक संपदा और जंगलों का संरक्षण स्थानीय लोगों के जीवन से जुड़ा हुआ है।उन्होंने विकास कार्यों के नाम पर पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाने की अपील की।
अभियान के तहत लोगों को किया जा रहा जागरूक
अरावली विरासत जन अभियान के माध्यम से लोगों को अरावली पर्वतमाला के महत्व और इसके संरक्षण की जरूरत के बारे में जागरूक किया जा रहा है। अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि अरावली को बचाने के लिए सरकार, स्थानीय समुदाय और पर्यावरण संगठनों को मिलकर काम करना होगा।