जालोर में पुलिस भर्ती घोटाला, वीडियो में देखें 37 के खिलाफ फर्जीवाड़े की FIR दर्ज, डमी कैंडिडेट बैठाए और फेक डॉक्यूमेंट दिए
राजस्थान में पुलिस भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने 37 कर्मचारियों के खिलाफ फर्जीवाड़े की FIR दर्ज की है। इन लोगों ने नौकरी पाने के लिए डमी कैंडिडेट को बैठाया और फर्जी डॉक्यूमेंट का इस्तेमाल किया।
पुलिस भर्ती और पदोन्नति बोर्ड, राजस्थान ने जुलाई 2024 में इस मामले की जांच के लिए जालोर एसपी को पत्र भेजा था। पत्र में पिछले पांच वर्षों में हुई भर्तियों में संदिग्ध अभ्यर्थियों की पहचान करने और फर्जी शैक्षणिक योग्यता वाले डॉक्यूमेंट देने वाले अभ्यर्थियों की सूची तैयार कर एसओजी को भेजने के आदेश दिए गए थे।
एसओजी ने इस निर्देश का पालन करते हुए जांच की और पाया कि कई अभ्यर्थियों ने अपने स्थान पर डमी कैंडिडेट को परीक्षा में बैठाया। इसके अलावा, उन्होंने फर्जी शैक्षणिक प्रमाण पत्र और दस्तावेज़ पेश कर नौकरी हासिल की। जांच के दौरान हस्ताक्षर (साइन) मिसमैच के कारण फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
जालोर पुलिस प्रशासन ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि भर्ती प्रक्रिया के कई स्तरों पर अनियमितताएं हुई हैं। एसओजी ने सभी संदिग्ध दस्तावेज और साक्ष्य जब्त कर लिए हैं। पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और फर्जीवाड़े में शामिल अन्य लोगों की पहचान के लिए अलग-अलग टीमों को लगाया गया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाता है। उन्होंने यह भी कहा कि दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और यदि आरोप साबित हुए तो उन्हें नौकरी से निष्कासित किया जाएगा।
राजस्थान पुलिस भर्ती और पदोन्नति बोर्ड ने भी भर्ती प्रक्रिया को और अधिक सख्त और पारदर्शी बनाने के लिए नए दिशा-निर्देश तैयार करने शुरू कर दिए हैं। इसके तहत भविष्य में किसी भी अभ्यर्थी के फर्जी डॉक्यूमेंट या डमी कैंडिडेट का उपयोग करना मुश्किल हो जाएगा।
इस प्रकार के मामले केवल भर्ती प्रक्रिया में खामियों को उजागर नहीं करते, बल्कि यह विभाग की नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े करते हैं। अधिकारी यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि भविष्य में ऐसे मामलों से बचा जा सके और योग्य उम्मीदवारों को सही तरीके से अवसर मिलें।
इस मामले की गहराई को देखते हुए एसओजी ने कहा है कि 37 आरोपी कर्मचारी फिलहाल एफआईआर में नामजद हैं, लेकिन जांच में संख्या बढ़ सकती है। अधिकारियों ने आम जनता से अपील की है कि यदि उन्हें भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता का पता चले, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।
यह मामला जालोर जिले में पुलिस भर्ती में पारदर्शिता और निगरानी की आवश्यकता को रेखांकित करता है। अधिकारियों का कहना है कि आगामी भर्तियों में हर स्तर पर कड़ी निगरानी और सुरक्षा उपाय लागू किए जाएंगे, ताकि किसी भी प्रकार के फर्जीवाड़े को रोका जा सके।