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जालोर उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला: चिकित्सा लापरवाही में निजी अस्पताल व डॉक्टर को 20 लाख मुआवजे का आदेश

 

जिला उपभोक्ता आयोग ने भीनमाल स्थित एक निजी अस्पताल और संबंधित डॉक्टर को चिकित्सा लापरवाही का दोषी मानते हुए बड़ा आदेश जारी किया है। आयोग ने मृतका के पति को 20 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया है।

चिकित्सा लापरवाही का आरोप सिद्ध

मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि इलाज में गंभीर लापरवाही बरती गई, जिसके कारण मरीज की मृत्यु हो गई। प्रस्तुत साक्ष्यों और मेडिकल रिकॉर्ड के आधार पर आयोग ने अस्पताल और डॉक्टर को जिम्मेदार माना।

20 लाख रुपये मुआवजे का आदेश

आयोग ने अपने फैसले में मृतका के पति को 20 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह राशि अस्पताल, संबंधित डॉक्टर और बीमा कंपनी द्वारा संयुक्त रूप से 45 दिनों के भीतर अदा करनी होगी।

बीमा कंपनी भी जिम्मेदार

आदेश में बीमा कंपनी को भी जिम्मेदार पक्ष माना गया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि चिकित्सा सेवाओं में बीमा कवर होने की स्थिति में भुगतान की जिम्मेदारी साझा रूप से तय की जाएगी।

परिजनों को मिली राहत

फैसले के बाद पीड़ित परिवार को कुछ राहत मिली है। परिजनों का कहना है कि लंबे समय से वे न्याय की लड़ाई लड़ रहे थे, जो अब जाकर आंशिक रूप से सफल हुई है।

चिकित्सा क्षेत्र के लिए संदेश

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला निजी अस्पतालों और डॉक्टरों के लिए एक सख्त संदेश है कि मरीजों के इलाज में लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा और इसके कानूनी परिणाम हो सकते हैं।

समय पर भुगतान के निर्देश

आयोग ने स्पष्ट किया है कि आदेश का पालन निर्धारित 45 दिनों के भीतर किया जाए, अन्यथा आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

यह फैसला चिकित्सा सेवाओं में जवाबदेही और मरीजों के अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।