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जालोर बना देश का सबसे बड़ा अनार हब, एक्सक्लूसिव फुटेज में देंखे ‘सिंदूरी अनार’ ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में बनाई खास पहचान

 

राजस्थान का जालोर जिला अब देश के सबसे बड़े अनार उत्पादक क्षेत्रों में शुमार होने लगा है। खासतौर पर जिले के जीवाणा–सायला क्षेत्र में उगाया जाने वाला ‘सिंदूरी अनार’ अपनी बेहतरीन गुणवत्ता, आकर्षक गहरे रंग, अधिक मिठास और लंबे समय तक ताजगी बनाए रखने की क्षमता के कारण देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी तेजी से पहचान बना रहा है। किसानों की मेहनत और अनुकूल जलवायु के चलते जालोर का यह अनार अब वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रहा है।

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सिंदूरी अनार की सबसे बड़ी खासियत इसका असाधारण आकार और वजन है। जहां सामान्य किस्मों के अनार का औसत वजन 150 से 250 ग्राम के बीच होता है, वहीं जालोर में उगाए जाने वाले सिंदूरी अनार का औसत वजन करीब 750 ग्राम तक पहुंच जाता है। बड़े आकार के साथ-साथ इसके दाने भी गहरे लाल रंग के, रसीले और बेहद मीठे होते हैं, जो बाजार में इसे अन्य किस्मों से अलग पहचान दिलाते हैं।

इस अनार की एक और बड़ी विशेषता इसकी लंबी शेल्फ लाइफ है। सामान्य अनार जहां एक सप्ताह के भीतर अपनी गुणवत्ता खोने लगते हैं, वहीं सिंदूरी अनार करीब 15 दिनों तक खराब नहीं होता। लंबे समय तक फ्रेश रहने की क्षमता के कारण यह किस्म निर्यात के लिहाज से भी बेहद उपयुक्त मानी जा रही है। यही वजह है कि इसकी मांग देश के बड़े शहरों के साथ-साथ विदेशों में भी लगातार बढ़ रही है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, जीवाणा–सायला क्षेत्र की मिट्टी और जलवायु सिंदूरी अनार की खेती के लिए बेहद अनुकूल है। कम पानी में बेहतर उत्पादन और रोग प्रतिरोधक क्षमता के चलते किसान इस फसल की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। इससे न केवल किसानों की आय में इजाफा हो रहा है, बल्कि क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था भी मजबूत हो रही है।

जालोर का सिंदूरी अनार अब बांग्लादेश सहित खाड़ी देशों में भी निर्यात किया जा रहा है। दुबई, सऊदी अरब और कतर जैसे देशों में इसकी मांग तेजी से बढ़ी है। निर्यातकों का कहना है कि बड़े आकार, आकर्षक रंग और मिठास के कारण यह अनार विदेशी बाजारों में प्रीमियम दाम पर बिक रहा है। इससे किसानों को पारंपरिक फसलों की तुलना में कहीं अधिक मुनाफा मिल रहा है।

स्थानीय किसानों का कहना है कि पहले वे बाजरा, जीरा और अन्य पारंपरिक फसलों पर निर्भर थे, लेकिन सिंदूरी अनार की खेती ने उनकी आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव किया है। कई किसान अब आधुनिक तकनीकों और ड्रिप इरिगेशन के जरिए अनार की खेती कर रहे हैं, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार हुआ है।

कृषि विभाग भी जालोर को अनार उत्पादन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और बाजार से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह योजनाबद्ध तरीके से खेती और मार्केटिंग की जाए, तो आने वाले वर्षों में जालोर न केवल देश बल्कि एशिया के प्रमुख अनार हब के रूप में उभर सकता है।

कुल मिलाकर, जालोर का सिंदूरी अनार राजस्थान की कृषि क्षमता का नया प्रतीक बनता जा रहा है। यह न सिर्फ किसानों की आमदनी बढ़ा रहा है, बल्कि प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय कृषि मानचित्र पर भी एक नई पहचान दिला रहा है।