जालोर में शादी से पहले विवाद, वीडियो में देंखे पंचों के बहिष्कार फरमान के खिलाफ परिवार पहुंचा थाने
राजस्थान के जालोर जिले में शादी से ठीक एक दिन पहले एक परिवार ने थाने पहुंचकर गांव के पंचों के कथित “बहिष्कार” आदेश के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। मामला भीनमाल क्षेत्र के एक गांव का बताया जा रहा है, जहां परिवार ने आरोप लगाया है कि सामाजिक दबाव के चलते उनकी शादी की तैयारियां प्रभावित हो रही हैं।परिवार के सदस्यों, जिनमें भाई-बहन शामिल हैं, ने थाने में पहुंचकर हाथों में लगी मेहंदी और शादी के कार्ड दिखाए। उनका कहना था कि सोमवार को उनकी बिंदौरी (शादी से जुड़ी पारंपरिक रस्म) निकाली जानी थी, लेकिन गांव के कुछ पंचों के डर और दबाव के कारण लोग समारोह में शामिल होने से कतरा रहे हैं।
परिवार का आरोप है कि गांव के पंचों ने एक फरमान जारी किया है, जिसके तहत यदि कोई व्यक्ति उनकी शादी या समारोह में शामिल होता है, तो उसे भी समाज से बाहर कर दिया जाएगा और आर्थिक दंड (जुर्माना) लगाया जाएगा। इसी डर के कारण ग्रामीण शादी में आने से बच रहे हैं।जानकारी के अनुसार, यह विवाद परिवार के एक सदस्य के लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़ा बताया जा रहा है। इसी कारण कथित तौर पर पूरे परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया है। इससे परिवार को आगामी विवाह समारोहों में गंभीर सामाजिक और मानसिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
परिवार के अनुसार, 20 अप्रैल को दो बहनों और 21 अप्रैल को भाई की शादी होनी है, लेकिन मौजूदा स्थिति के कारण सभी तैयारियां प्रभावित हो गई हैं और विवाह समारोह को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।Bhinmal क्षेत्र में सामने आए इस मामले ने स्थानीय स्तर पर चर्चा को जन्म दे दिया है। पीड़ित परिवार ने पुलिस से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि इस तरह के सामाजिक फरमान उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हैं।
पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी है और संबंधित पक्षों से बातचीत की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी भी प्रकार का दबाव या गैरकानूनी सामाजिक बहिष्कार पाया जाता है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल यह मामला सामाजिक परंपराओं और व्यक्तिगत अधिकारों के बीच टकराव का एक और उदाहरण बनकर सामने आया है, जिस पर प्रशासन की नजर बनी हुई है।