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गणतंत्र दिवस से पहले जैसलमेर में जासूसी का शक, वीडियो में देखें ISI के लिए काम करने के आरोप में युवक अरेस्ट

 

गणतंत्र दिवस से कुछ घंटे पहले राजस्थान के सीमावर्ती जिले जैसलमेर में सुरक्षा एजेंसियों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक संदिग्ध युवक को हिरासत में लिया है। युवक पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के लिए जासूसी करने के गंभीर आरोप हैं। सुरक्षा एजेंसियों को प्रारंभिक जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि आरोपी सामरिक महत्व की सूचनाएं पाकिस्तान तक पहुंचा रहा था।

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हिरासत में लिए गए युवक की पहचान झाबराराम पुत्र भानाराम मेघवाल, निवासी नेहड़ान गांव के रूप में हुई है। आरोपी बॉर्डर एरिया में ई-मित्र केंद्र का संचालन करता था, जिससे उसे स्थानीय लोगों और प्रशासनिक गतिविधियों से जुड़ी जानकारियों तक आसानी से पहुंच मिलती थी। इसी आड़ में उसके संदिग्ध गतिविधियों में शामिल होने की आशंका जताई जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियों को इनपुट मिले थे कि झाबराराम एक पाकिस्तानी महिला हैंडलर के संपर्क में था। बताया जा रहा है कि आरोपी को सोशल मीडिया और ऑनलाइन माध्यमों से हनीट्रेप में फंसाया गया, जिसके बाद उससे संवेदनशील और सामरिक महत्व की जानकारियां साझा करवाई गईं। इन जानकारियों में सीमावर्ती इलाकों की गतिविधियां और अन्य महत्वपूर्ण सूचनाएं शामिल होने की आशंका है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए सीआईडी-इंटेलिजेंस की टीम ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। शुरुआती पूछताछ के बाद उसे आगे की जांच के लिए जयपुर ले जाया गया है, जहां केंद्रीय और राज्य स्तरीय एजेंसियां उससे संयुक्त रूप से पूछताछ कर रही हैं।

जांच में सामने आया है कि आरोपी पिछले चार वर्षों से अपने गांव में ई-मित्र केंद्र चला रहा था। इस दौरान उसका संपर्क किन-किन लोगों से रहा, किन सेवाओं के जरिए उसने सूचनाएं जुटाईं और किस माध्यम से वह डेटा साझा करता था—इन सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है।

सुरक्षा एजेंसियों ने आरोपी के कंप्यूटर, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों को जब्त कर लिया है, जिन्हें फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। फोरेंसिक रिपोर्ट से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आरोपी ने किन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल किया, कितनी बार और किस तरह की सूचनाएं साझा की गईं और उसका नेटवर्क कितना व्यापक है।

गणतंत्र दिवस जैसे संवेदनशील मौके से ठीक पहले इस तरह की गिरफ्तारी ने सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता को भी उजागर किया है। सीमावर्ती जिलों में पहले से ही हाई अलर्ट घोषित था और संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही थी। इसी दौरान मिले इनपुट के आधार पर यह कार्रवाई की गई।

फिलहाल, एजेंसियां यह भी जांच कर रही हैं कि आरोपी अकेले काम कर रहा था या इसके पीछे कोई स्थानीय या अंतरराज्यीय नेटवर्क भी सक्रिय है। साथ ही, यह भी पता लगाया जा रहा है कि अब तक साझा की गई जानकारियों से देश की सुरक्षा को कितना नुकसान पहुंचा है।

सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा। वहीं, इस घटना के बाद सीमावर्ती इलाकों में निगरानी और कड़ी कर दी गई है, ताकि किसी भी तरह की राष्ट्रविरोधी गतिविधि को समय रहते रोका जा सके।