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जैसलमेर में अस्पताल के सामने प्रस्तावित डिवाइडर पर बढ़ी नाराज़गी, नागरिक बोले— सुविधा नहीं, बढ़ेगी मुश्किल

 

। शहर के हनुमान चौराहा क्षेत्र में स्थित राजकीय जवाहिर अस्पताल के सामने प्रस्तावित डिवाइडर निर्माण कार्य को लेकर स्थानीय नागरिकों में चिंता और असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। लोगों का कहना है कि अस्पताल जैसे अति संवेदनशील इलाके में बिना उचित कट और ऊंचे डिवाइडर का निर्माण आमजन और मरीजों के लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर सकता है।

जानकारी के अनुसार, यातायात व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से प्रशासन द्वारा अस्पताल के सामने सड़क पर डिवाइडर बनाने की योजना तैयार की गई है। हालांकि, स्थानीय व्यापारियों, वाहन चालकों और मरीजों के परिजनों का मानना है कि यह फैसला जमीनी हकीकत को नजरअंदाज कर लिया गया है।

नागरिकों का कहना है कि अस्पताल क्षेत्र में 24 घंटे एंबुलेंस, निजी वाहन और मरीजों की आवाजाही बनी रहती है। ऐसे में बिना कट वाला ऊंचा डिवाइडर आपातकालीन सेवाओं के लिए बाधा बन सकता है। गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में देरी होने का खतरा बढ़ जाएगा, जिससे जान का जोखिम भी हो सकता है।

स्थानीय लोगों ने बताया कि वर्तमान में दोनों दिशाओं से सीधे अस्पताल तक पहुंचना आसान है, लेकिन डिवाइडर बनने के बाद वाहनों को लंबा चक्कर लगाना पड़ेगा। इससे ट्रैफिक जाम की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है। खासकर पीक आवर्स में स्थिति और गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है।

व्यापारियों ने भी इस योजना पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अस्पताल के आसपास कई मेडिकल स्टोर, जांच केंद्र और छोटी दुकानें हैं, जहां रोजाना बड़ी संख्या में लोग आते हैं। डिवाइडर बनने से ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होगी और व्यापार पर भी असर पड़ेगा।

नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि डिवाइडर निर्माण से पहले स्थानीय लोगों की राय ली जाए और अस्पताल क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त कट या वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। उनका सुझाव है कि ट्रैफिक नियंत्रण के लिए अन्य उपायों पर विचार किया जाए, ताकि मरीजों और आमजन को परेशानी न हो।

कुछ सामाजिक संगठनों ने भी इस मुद्दे को लेकर ज्ञापन सौंपने की तैयारी की है। उनका कहना है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर किसी भी निर्माण कार्य से पहले व्यापक सर्वे और विशेषज्ञों की सलाह जरूरी है।

फिलहाल, प्रशासन की ओर से इस मामले में आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन नागरिकों की बढ़ती चिंता को देखते हुए इस मुद्दे पर पुनर्विचार की मांग तेज हो गई है। अब देखना होगा कि प्रशासन जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए क्या फैसला लेता है।