जैसलमेर में दिखा दुर्लभ कैराकल, वन विभाग और WII ने बढ़ाई निगरानी
राजस्थान के जैसलमेर जिले में भारत-पाकिस्तान सीमा क्षेत्र के पास एक बेहद दुर्लभ और विलुप्तप्राय वन्य जीव कैराकल के दिखाई देने से वन विभाग और वन्यजीव प्रेमियों में उत्साह देखने को मिला है। इस दुर्लभ प्रजाति की मौजूदगी ने एक बार फिर जैसलमेर के रेगिस्तानी इलाकों की जैव विविधता को चर्चा में ला दिया है।
वन विभाग और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) ने कैराकल के संरक्षण को लेकर अपने प्रयासों को तेज कर दिया है। इस दिशा में विशेष निगरानी अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत कुल 9 मोशन सेंसिंग कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं। इन कैमरों की मदद से कैराकल की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि उसके रहन-सहन और व्यवहार को बेहतर तरीके से समझा जा सके।
जानकारी के अनुसार, 25 जनवरी 2026 को वन विभाग ने एक नर कैराकल को रेडियो कॉलर लगाकर जंगल में फिर से छोड़ा था। इसके बाद से ही उसके संभावित आवास क्षेत्रों में कैमरा ट्रैप के माध्यम से निगरानी की जा रही है। इस तकनीक की मदद से वैज्ञानिक और वन अधिकारी कैराकल की लोकेशन, मूवमेंट और गतिविधियों को ट्रैक कर रहे हैं।
कैराकल एक बेहद फुर्तीला और शर्मीला वन्य जीव है, जिसे आमतौर पर कम ही देखा जाता है। इसकी संख्या तेजी से घटने के कारण इसे दुर्लभ प्रजातियों में शामिल किया गया है। ऐसे में इसका जैसलमेर में दिखना संरक्षण के नजरिए से एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस प्रजाति के संरक्षण के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और निगरानी को और मजबूत किया जाएगा। साथ ही, स्थानीय लोगों और सीमा क्षेत्र के आसपास रहने वाले लोगों से भी अपील की जा रही है कि वे इस दुर्लभ जीव को किसी तरह का नुकसान न पहुंचाएं और इसके संरक्षण में सहयोग करें।
विशेषज्ञों का मानना है कि कैराकल की उपस्थिति इस बात का संकेत है कि जैसलमेर का यह क्षेत्र वन्यजीवों के लिए अभी भी उपयुक्त आवास बना हुआ है। यदि सही तरीके से संरक्षण किया जाए तो इस दुर्लभ प्रजाति को बचाया जा सकता है और इसकी संख्या में भी बढ़ोतरी संभव है। फिलहाल, वन विभाग और WII की टीम इस प्रजाति पर बारीकी से नजर बनाए हुए है और आने वाले समय में इसके संरक्षण को लेकर और भी ठोस कदम उठाए जाने की उम्मीद है।