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जड़ों से जुड़े रहे कर्पूर चन्द्र कुलिश, गागरडू गांव का विकास मॉडल आज भी मिसाल

 

कर्पूर चन्द्र कुलिश अपने जीवन में हमेशा अपनी जड़ों से जुड़े रहे और समाज के विकास के लिए निरंतर कार्य करते रहे। उनकी सोच और कार्यशैली का एक उत्कृष्ट उदाहरण राजस्थान के गागरडू गांव में देखने को मिलता है, जिसे आज भी एक आदर्श विकास मॉडल के रूप में याद किया जाता है।

राजस्थान पत्रिका के संस्थापक कुलिश जी का मानना था कि वास्तविक विकास तभी संभव है जब गांवों का समग्र विकास हो और ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं सुलभ हों। इसी सोच के तहत गागरडू गांव में शिक्षा, स्वच्छता, जल प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में विशेष कार्य किए गए, जो आज भी प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं।

गागरडू गांव में किए गए प्रयासों के तहत स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण और जल संरक्षण को प्राथमिकता दी गई। ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए समय-समय पर अभियान चलाए गए, जिससे गांव में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला। इस मॉडल ने यह साबित किया कि सामूहिक प्रयास और सही दिशा में की गई पहल से किसी भी गांव का कायाकल्प किया जा सकता है।

कुलिश जी का जीवन इस बात का उदाहरण है कि यदि व्यक्ति अपनी जड़ों से जुड़ा रहे और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझे, तो वह बड़े बदलाव ला सकता है। उन्होंने न केवल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई, बल्कि समाज सेवा के क्षेत्र में भी अमिट छाप छोड़ी।

आज भी गागरडू गांव का विकास मॉडल अन्य गांवों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यहां की व्यवस्थाएं और सामाजिक जागरूकता यह दर्शाती हैं कि सही नेतृत्व और दूरदृष्टि से ग्रामीण जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि कुलिश जी की सोच आज के समय में और भी अधिक प्रासंगिक हो गई है, जब ग्रामीण विकास और सतत विकास की बात की जा रही है। उनका यह मॉडल हमें सिखाता है कि विकास केवल योजनाओं से नहीं, बल्कि समाज की भागीदारी से ही संभव है।

कुल मिलाकर, कर्पूर चन्द्र कुलिश का जीवन और गागरडू गांव का विकास मॉडल यह संदेश देता है कि यदि हम अपनी जड़ों से जुड़े रहें और समाज के लिए कार्य करें, तो एक आदर्श और सशक्त समाज का निर्माण संभव है।