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जैसलमेर का सोनार किला: पीली पत्थरों से चमकता इतिहास, यूनेस्को विश्व धरोहर में शामिल

 

Jaisalmer का ऐतिहासिक Jaisalmer Fort, जिसे “सोनार किला” के नाम से भी जाना जाता है, राजस्थान की शान और विश्व धरोहर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। पीले बलुआ पत्थरों से बना यह किला सूर्य की रोशनी में सोने जैसा चमकता है, जिससे इसे यह विशेष पहचान मिली है।

इस किले को वर्ष 2013 में UNESCO World Heritage Centre की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया, जिससे इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्वता को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली।

इतिहासकारों के अनुसार, इस किले का निर्माण 12वीं शताब्दी में भाटी राजपूत शासक राव जैसल ने करवाया था। यह किला लंबे समय तक व्यापारिक मार्गों का महत्वपूर्ण केंद्र रहा और यहां से होकर ऊंट कारवां गुजरते थे, जो मध्य एशिया और भारत के बीच व्यापार को जोड़ते थे।

किले की सबसे खास बात यह है कि यह आज भी पूरी तरह जीवंत है। इसके भीतर हजारों लोग रहते हैं और यहां मंदिर, हवेलियां, दुकानें और रिहायशी मकान मौजूद हैं, जिससे यह एक “लिविंग फोर्ट” के रूप में जाना जाता है। इसकी संकरी गलियां और प्राचीन वास्तुकला पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित करती हैं।

घूमने के लिए सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च के बीच माना जाता है, जब मौसम सुहावना होता है और रेगिस्तानी गर्मी से राहत मिलती है। इस दौरान किले की सुंदरता और भी बढ़ जाती है और पर्यटक आराम से घूम सकते हैं।

Jaisalmer रेल और सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। निकटतम रेलवे स्टेशन जैसलमेर जंक्शन है, जबकि हवाई मार्ग के लिए जोधपुर एयरपोर्ट सबसे नजदीकी विकल्प है। वहां से सड़क मार्ग द्वारा आसानी से किले तक पहुंचा जा सकता है।

कुल मिलाकर, सोनार किला न केवल राजस्थान की समृद्ध विरासत का प्रतीक है, बल्कि यह भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को भी विश्व मंच पर गौरवपूर्ण तरीके से प्रस्तुत करता है।