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वीडियो में देखें आर्मी चीफ का बडा बयान, युद्ध का समय जल्द आयेगा, भारत को लंबी लड़ाई के लिए बनना होगा आत्मनिर्भर

 

चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने देश की सुरक्षा और भविष्य की युद्ध तैयारियों को लेकर बड़ा और अहम बयान दिया है। उन्होंने कहा कि युद्ध की अवधि पहले से तय नहीं की जा सकती, इसलिए भारत को किसी भी संभावित हालात से निपटने के लिए लंबी लड़ाई की पूरी तैयारी रखनी होगी। इसके लिए आत्मनिर्भरता सबसे अहम है, खासकर रक्षा क्षेत्र में।

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जनरल द्विवेदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कोई भी यह नहीं बता सकता कि युद्ध चार दिन चलेगा या चार साल। युद्ध की वास्तविक स्थिति का अंदाजा मैदान में पहुंचने के बाद ही लगता है। ऐसे में अगर देश को लंबे समय तक संघर्ष करना पड़े, तो विदेशी निर्भरता एक बड़ी कमजोरी साबित हो सकती है। उन्होंने कहा कि भारत को ऐसी स्थिति के लिए अभी से खुद को मजबूत करना होगा।

आर्मी चीफ ने जोर देकर कहा कि सेना के हथियार, गोला-बारूद और अन्य जरूरी साजो-सामान देश में ही बनाए जाने चाहिए। इतना ही नहीं, इन हथियारों और उपकरणों की मरम्मत और रखरखाव की पूरी क्षमता भी भारत के पास होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर युद्ध के दौरान किसी उपकरण में खराबी आती है और उसे ठीक करने के लिए विदेश पर निर्भर रहना पड़े, तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।

जनरल द्विवेदी के मुताबिक आत्मनिर्भरता का मतलब सिर्फ निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि सप्लाई चेन, स्पेयर पार्ट्स और तकनीकी विशेषज्ञता भी देश के भीतर होनी चाहिए। तभी सेना किसी भी परिस्थिति में बिना रुकावट और मजबूती के साथ दुश्मन का मुकाबला कर सकती है। उन्होंने कहा कि लंबी लड़ाई में वही देश टिक पाता है, जिसकी औद्योगिक और तकनीकी क्षमता मजबूत होती है।

उन्होंने यह भी कहा कि बदलते वैश्विक हालात और आधुनिक युद्ध की प्रकृति को देखते हुए भारत को अपनी रणनीति में दीर्घकालिक सोच अपनानी होगी। आज के युद्ध सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं रहते, बल्कि साइबर, अंतरिक्ष और तकनीक के मोर्चे पर भी लड़े जाते हैं। ऐसे में रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता भारत को बहुआयामी ताकत देती है।

आर्मी चीफ का यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण पर लगातार जोर दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जनरल द्विवेदी का यह संदेश न सिर्फ सेना, बल्कि नीति निर्धारकों और रक्षा उद्योग के लिए भी एक स्पष्ट दिशा संकेत करता है। उनका बयान यह साफ करता है कि देश की सुरक्षा के लिए आत्मनिर्भरता अब विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता बन चुकी है।