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वीडियो में देखें पूर्व मंत्री खाचरियावास ने राज्य सरकार के बजट को बताया दिशाहीन और जनविरोधी

 

पूर्व मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने राज्य सरकार के हालिया बजट को कड़ी आलोचना का निशाना बनाया है। उन्होंने कहा कि यह सरकार का तीसरा बजट है, लेकिन प्रदेश में विकास के ठोस नतीजे अभी तक दिखाई नहीं दे रहे हैं। खाचरियावास ने इसे दिशाहीन और जनविरोधी बताया और कहा कि जनता के हितों के बजाय यह बजट केवल खोखले वादों पर आधारित है।

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खाचरियावास ने आरोप लगाया कि बजट पेश करने की प्रक्रिया में पर्याप्त चर्चा नहीं की गई और लोकतांत्रिक परंपराओं की अनदेखी की गई। उनका कहना है कि बजट को पारित करते समय सभी हितधारकों और विशेषज्ञों की राय को शामिल करना आवश्यक था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

पूर्व मंत्री ने जयपुर के करीब 3000 करोड़ रुपए के विकास प्रोजेक्ट्स रद्द किए जाने पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएं शहर के विकास और बुनियादी ढांचे को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती थीं। अब सरकार केवल वादों पर निर्भर होकर जनता को गुमराह कर रही है।

खाचरियावास ने कहा, “जनता के सामने बजट को वास्तविक विकास योजना के रूप में पेश करना चाहिए, लेकिन यह बजट सिर्फ दिखावे और घोषणाओं तक सीमित है। इसमें कोई ठोस रणनीति नहीं है, जिससे प्रदेश के लोगों को लाभ मिल सके।” उन्होंने यह भी कहा कि बजट में निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए कोई स्पष्ट नीति नजर नहीं आती।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बजट के खिलाफ विपक्ष की यह प्रतिक्रिया सरकार के लिए चुनौती बन सकती है। खाचरियावास जैसे वरिष्ठ नेता बजट की पारदर्शिता और विकास की गति को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं, जो आगामी विधानसभा सत्र और स्थानीय चुनावों में राजनीतिक बहस का हिस्सा बन सकते हैं।

कांग्रेस नेता का यह भी कहना है कि बजट के दौरान नागरिकों की वास्तविक समस्याओं जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क और बुनियादी सुविधाओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। इसके अलावा, निवेश और उद्योग को बढ़ावा देने वाली योजनाओं की कमी से प्रदेश की आर्थिक वृद्धि प्रभावित हो सकती है।

खाचरियावास की आलोचना के बाद अब सरकार पर यह दबाव बढ़ गया है कि वह बजट में बताए गए वादों को वास्तविक रूप से लागू करे और जनता को ठोस लाभ पहुंचाए। विपक्ष का मानना है कि बिना ठोस क्रियान्वयन के बजट केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएगा।

इस बीच, राजनीतिक विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि बजट और विकास परियोजनाओं के रद्द होने का मुद्दा आगामी समय में प्रदेश में सियासी बहस और जनसुनवाई का केंद्र बन सकता है।

कुल मिलाकर, खाचरियावास की यह प्रतिक्रिया राज्य सरकार के बजट और विकास नीतियों पर सवाल खड़े करती है। उनका आरोप है कि सरकार केवल दिखावे और वादों में लगी है, जबकि जनता को वास्तविक लाभ और विकास की प्रतीक्षा है।