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मनरेगा को लेकर सीएम के बयान पर टीकाराम जूली का तीखा पलटवार, फुटेज में देखें बताया– ग्रामीण लोकतंत्र के साथ ऐतिहासिक विश्वासघात

 

राजस्थान में मनरेगा को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के मनरेगा से जुड़े बयान पर कड़ा पलटवार किया है। जूली ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि मनरेगा के बदले हुए प्रावधानों का समर्थन करना राजस्थान के ग्रामीण परिवेश और गरीब वर्ग की पीठ में छुरा घोंपने जैसा है।

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टीकाराम जूली ने बयान जारी कर कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस मुख्यमंत्री से गांवों और ग्रामीणों को सबसे ज्यादा उम्मीद थी, वही आज ऐसी नीतियों के समर्थन में खड़े नजर आ रहे हैं, जो सीधे तौर पर ग्राम सभाओं और ग्रामीण अधिकारों को कमजोर करती हैं। उन्होंने कहा कि भजनलाल शर्मा ने अपना राजनीतिक सफर पंचायती राज व्यवस्था से शुरू किया था, इसलिए उनसे यह अपेक्षा की जा रही थी कि वे गांवों की आवाज बनेंगे, न कि उनके अधिकारों को सीमित करने वाली योजनाओं का समर्थन करेंगे।

जूली ने तीखे शब्दों में कहा, “यह विडंबना है कि पंचायती राज व्यवस्था से राजनीति में पहचान बनाने वाले भजनलाल शर्मा आज ग्राम सभाओं के अधिकारों का गला घोंटने वाली योजना के ब्रांड एंबेसडर बन गए हैं। जिस व्यवस्था ने उन्हें पहचान दी, उसी को कमजोर करने में वे केंद्र सरकार का सक्रिय हिस्सा बनते जा रहे हैं।”

नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री की भूमिका पर सवाल उठाते हुए इसे सिर्फ राजनीतिक अवसरवाद नहीं, बल्कि ग्रामीण लोकतंत्र के साथ ऐतिहासिक विश्वासघात करार दिया। उन्होंने कहा कि मनरेगा जैसी योजना ग्रामीण गरीबों के लिए केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा की रीढ़ है। इसमें किसी भी तरह का कमजोर किया जाना सीधे तौर पर गांव, किसान और मजदूर के हितों के खिलाफ है।

टीकाराम जूली ने यह भी कहा कि यह राजस्थान का दुर्भाग्य है कि मुख्यमंत्री स्वयं ग्रामीण परिवेश से आने के बावजूद दिल्ली के आलाकमान की भाषा बोल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भजनलाल शर्मा राजस्थान के हितों की रक्षा करने के बजाय केवल दिल्ली के संदेशवाहक बनकर रह गए हैं। जूली ने कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री का कर्तव्य है कि वे केंद्र के सामने राजस्थान की आवाज मजबूती से रखें, न कि आंख मूंदकर हर फैसले का समर्थन करें।

उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस पार्टी मनरेगा और ग्राम सभाओं के अधिकारों के साथ मजबूती से खड़ी है और किसी भी कीमत पर ग्रामीण हितों से समझौता नहीं किया जाएगा। जूली ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने मनरेगा को कमजोर करने वाले फैसलों को वापस नहीं लिया, तो कांग्रेस सड़कों से लेकर सदन तक इसका विरोध करेगी।