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पाकिस्तान से बातचीत को लेकर सियासत तेज, वीडियो में देखें टीकाराम जूली ने आरएसएस और विदेश नीति पर उठाए सवाल

 

राजस्थान की राजनीति में पाकिस्तान से बातचीत को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और केंद्र की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है। टीकाराम जूली ने कहा कि एक ओर यह दावा किया जाता है कि “खून और पानी एक साथ नहीं बह सकता”, तो वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान के साथ बातचीत की जरूरत क्यों बताई जा रही है, इसका जवाब स्पष्ट होना चाहिए। उन्होंने इस मुद्दे पर आरएसएस से भी स्पष्टीकरण की मांग की है।

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उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने जब-जब देश के खिलाफ गड़बड़ की है, तब भारतीय सेना ने उसका कड़ा जवाब दिया है। जूली के अनुसार, ऐसे में बातचीत की वकालत करना उन शहीद सैनिकों के शौर्य और बलिदान का अपमान है, जिन्होंने देश की सुरक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया है।

यह बयान उस टिप्पणी के बाद आया है, जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने कहा था कि भारत को पाकिस्तान के साथ बातचीत के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं करने चाहिए।

टीकाराम जूली ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि एक तरफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की स्थिति को लेकर अमेरिका जैसी शक्तियों की आलोचनात्मक टिप्पणियां सामने आती हैं, और दूसरी ओर आरएसएस जैसे संगठन पाकिस्तान से बातचीत की बात करते हैं, जिससे नीति को लेकर असमंजस की स्थिति बनती है।

उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के बयानों से देश की विदेश नीति को लेकर भ्रम पैदा होता है और यह राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर गलत संदेश देता है।

इस पूरे विवाद ने एक बार फिर भारत-पाकिस्तान संबंधों और विदेश नीति को लेकर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। जहां एक ओर बातचीत के पक्ष में तर्क दिए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इसे सुरक्षा और शहीदों के सम्मान से जोड़कर विरोध भी जताया जा रहा है।