टीकाराम जूली का बीजेपी पर हमला, वीडियो में देखें बोले– दलित नेता प्रतिपक्ष को हजम नहीं कर पा रही भाजपा
राज्य विधानसभा में जारी गतिरोध के बीच नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर तीखा हमला बोला है। जूली ने बीजेपी पर विधानसभा की कार्यवाही को जानबूझकर बाधित करने और उन्हें व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह पहली बार है जब विधानसभा में एक दलित नेता प्रतिपक्ष बना है और बीजेपी इसे स्वीकार नहीं कर पा रही है।
सर्वदलीय बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए टीकाराम जूली ने कहा, “पहली बार एक दलित नेता प्रतिपक्ष बना है, इसको तो हजम करो। पूरी बीजेपी एक दलित नेता प्रतिपक्ष को हजम नहीं कर पा रही है। इनकी हालत यह है कि ये प्लानिंग करते रहते हैं कि टीकाराम जूली को किस तरह कमजोर किया जाए। ये लगातार मेरे पीछे लगे रहते हैं।”
जूली ने आरोप लगाया कि विधानसभा की कार्यवाही बाधित करने का काम अब तक बीजेपी ने ही किया है। उन्होंने कहा कि सदन के भीतर बीजेपी विधायक जानबूझकर शोर मचाते हैं, विपक्ष के नेताओं को उकसाते हैं और फिर कार्यवाही को ठप कर देते हैं। जूली के मुताबिक, “सदन में ये लोग चिल्लाकर हम लोगों को छेड़ते हैं और फिर सदन को बाधित कर देते हैं। किसी तरह की मीटिंग नहीं करते, न ही संवाद की कोशिश करते हैं।”
नेता प्रतिपक्ष ने इस बात पर भी जोर दिया कि विधानसभा में बड़े-बड़े और जटिल मुद्दों का समाधान हमेशा बातचीत और आपसी सहमति से ही निकला है। उन्होंने कहा कि पक्ष और विपक्ष के बीच संवाद लोकतंत्र की बुनियाद है, लेकिन मौजूदा हालात में बीजेपी बातचीत से बच रही है। “पूछो ही मत, बात ही मत करने दो—इनका रवैया यही है,” जूली ने कहा।
टीकाराम जूली ने आगे आरोप लगाया कि बीजेपी का रवैया नेता प्रतिपक्ष के प्रति असम्मानजनक है। उन्होंने कहा, “इनका तो यही एजेंडा है कि जैसे ही नेता प्रतिपक्ष खड़ा हो, उसे बैठा दो। उसे सवाल पूछने मत दो। लोकतंत्र में सवाल पूछना विपक्ष का अधिकार होता है, लेकिन बीजेपी उसे भी दबाना चाहती है।”
जूली के इन बयानों के बाद सियासी हलकों में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि बीजेपी सत्ता के घमंड में लोकतांत्रिक मर्यादाओं को नजरअंदाज कर रही है, जबकि बीजेपी की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
विधानसभा में लगातार हो रहे हंगामे और आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह साफ है कि सियासी टकराव और गहराता जा रहा है। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच संवाद स्थापित हो पाता है या सदन की कार्यवाही इसी तरह बाधित होती रहेगी।