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इस साल राजस्थान और देश में होलिका दहन और धुलंडी को लेकर असमंजस, 3 मार्च के चंद्र ग्रहण और भद्रा कारण

 

राजस्थान समेत पूरे देश में इस साल होलिका दहन और रंगों वाली होली (धुलंडी) को लेकर लोगों में थोड़ी असमंजस की स्थिति है। इसका मुख्य कारण 3 मार्च को होने वाला साल का पहला चंद्र ग्रहण और भद्रा का साया माना जा रहा है। इन खगोलीय घटनाओं के चलते लोगों को यह समझने में कठिनाई हो रही है कि होलिका दहन और धुलंडी कब करनी चाहिए।

ज्योतिषविदों और पंचांग विशेषज्ञों के अनुसार, होलिका दहन और धुलंडी का समय चंद्रमा की स्थिति और भद्रा के प्रभाव के आधार पर निश्चित किया जाता है। चंद्र ग्रहण के दौरान की गई पूजा या उत्सव को कुछ शुभ नहीं माना जाता, इसलिए इस साल पंचांग के अनुसार होलिका दहन की तिथि ग्रहण समाप्त होने के बाद तय की गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह नियम न केवल धार्मिक अनुष्ठानों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक और सामुदायिक आयोजनों के सही समय निर्धारण में भी मदद करता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि होली के दौरान सभी धार्मिक और पारंपरिक कर्म शुभ समय पर संपन्न हों।

पंचांग के अनुसार, इस साल होलिका दहन और धुलंडी की तिथियां इस प्रकार हैं:

होलिका दहन: ग्रहण और भद्रा के प्रभाव के बाद निर्धारित समय पर।

धुलंडी (रंगों वाली होली): होलिका दहन के अगले दिन।

इस साल होली के शुभ समय और तिथियों को ध्यान में रखते हुए आयोजक और परिवार अपने उत्सव की योजना बना सकते हैं। ज्योतिषियों का सुझाव है कि धार्मिक अनुष्ठान और होली खेलना दोनों शुभ समय पर करें ताकि परंपरा और धार्मिक मान्यता का पालन हो सके।

इस तरह, इस साल राजस्थान और देश के लोग चंद्र ग्रहण और भद्रा के प्रभाव से सुरक्षित रहकर होली का उत्सव मनाने के लिए पूरी तैयारी कर सकते हैं।