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चुनाव में देरी पर राज्य चुनाव आयोग ने हाईकोर्ट से मांगी बिना शर्त माफी, वीडियो में सरकार बोली- नई डेडलाइन तय हो चुकी

 

State Election Commission Rajasthan ने पंचायत और निकाय चुनाव समय पर नहीं कराने को लेकर Rajasthan High Court में बिना शर्त माफी मांगी है। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान आयोग ने कहा कि राज्य सरकार से जरूरी डेटा समय पर नहीं मिलने के कारण चुनाव प्रक्रिया तय समय सीमा में पूरी नहीं हो सकी।अदालत में पेश जवाब में राज्य चुनाव आयोग के अध्यक्ष Rajeshwar Singh और सचिव Rajesh Verma ने कहा कि चुनाव में हुई देरी के लिए आयोग सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने हाईकोर्ट के आदेश की जानबूझकर अवहेलना नहीं की है।

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दरअसल, हाईकोर्ट ने पहले 15 अप्रैल तक चुनाव कराने की समय सीमा तय की थी, लेकिन निर्धारित अवधि में चुनाव नहीं हो पाए। इसके बाद चुनाव में देरी को लेकर अवमानना याचिका दायर की गई थी। इसी मामले में मंगलवार को सुनवाई हुई।सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि हाईकोर्ट की डिवीन बेंच पहले ही चुनाव कराने के लिए नई समय सीमा तय कर चुकी है। सरकार के अनुसार अब 31 मई 2026 तक चुनाव करवाने का निर्देश दिया गया है। ऐसे में पहले वाली समय सीमा के आधार पर दायर अवमानना याचिका अब प्रभावहीन हो गई है।

सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि नई डेडलाइन तय होने के बाद पुराने आदेश के उल्लंघन का सवाल स्वतः समाप्त हो जाता है। वहीं आयोग ने अदालत को भरोसा दिलाया कि नई समय सीमा के भीतर चुनाव प्रक्रिया पूरी करने के प्रयास किए जा रहे हैं।इस मामले में सबसे बड़ा मुद्दा आरक्षण और चुनावी डेटा से जुड़ा हुआ माना जा रहा है। ओबीसी आरक्षण, वार्ड पुनर्गठन और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं में देरी के कारण चुनाव कार्यक्रम प्रभावित हुआ। आयोग का कहना है कि जब तक सरकार की ओर से अंतिम डेटा उपलब्ध नहीं कराया जाता, तब तक चुनाव की अधिसूचना जारी करना संभव नहीं होता।

राजनीतिक हलकों में इस मामले को लेकर लगातार बहस जारी है। विपक्षी दल राज्य सरकार और चुनाव आयोग दोनों पर चुनाव टालने के आरोप लगा रहे हैं। वहीं सरकार और आयोग का कहना है कि सभी संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन करना जरूरी है और जल्दबाजी में चुनाव कराना उचित नहीं होगा।कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अब पूरा मामला नई समय सीमा और आरक्षण प्रक्रिया की प्रगति पर निर्भर करेगा। यदि प्रशासनिक तैयारियां समय पर पूरी नहीं हुईं तो चुनाव कार्यक्रम फिर प्रभावित हो सकता है। फिलहाल हाईकोर्ट की निगरानी में चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ रही है और राज्य चुनाव आयोग पर तय समय सीमा के भीतर चुनाव कराने का दबाव बना हुआ है।