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वीडियो में देंखे राजस्थान हाईकोर्ट ने जेडीए को सामुदायिक केंद्र खाली करने के आदेश दिए

 

राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर की पत्रकार कॉलोनी स्थित सामुदायिक केंद्र में संचालित जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) के जोन कार्यालय (पीआरएन-साउथ) को खाली करने का आदेश दिया है। यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एसपी शर्मा की खंडपीठ ने श्याम सुंदर शर्मा और अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया।

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अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी सरकारी विभाग या अधिकारी को सार्वजनिक उपयोग के भवन पर कब्जा करने का अधिकार नहीं है। सामुदायिक केंद्र जनता के लिए बनाया गया है और इसे सार्वजनिक उपयोग के लिए खुला रखा जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने जेडीए से कहा कि वे अपना कार्यालय किराए के भवन में स्थानांतरित करें और सामुदायिक केंद्र को जनता के लिए उपलब्ध कराएं।

जानकारी के अनुसार, जेडीए ने अदालत से सामुदायिक केंद्र से कार्यालय ट्रांसफर करने के लिए लगभग दो साल का समय मांगा था। हालांकि, अदालत ने यह अनुरोध खारिज करते हुए कहा कि सार्वजनिक संपत्ति पर किसी सरकारी विभाग का स्थायी कब्जा स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने आदेश में यह भी कहा कि सरकारी विभागों को केवल अल्पकालिक उपयोग की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन किसी भी स्थिति में यह जनता के अधिकारों के विपरीत नहीं होना चाहिए।

विशेषज्ञों का कहना है कि सार्वजनिक उपयोग के भवनों का सही तरीके से प्रबंधन और उनका खुला रहना नागरिकों के हित में आवश्यक है। सामुदायिक केंद्र जैसे भवन सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए बनाए जाते हैं, और इन पर सरकारी विभागों का कब्जा जनता की सुविधा को बाधित करता है।

जेडीए के अधिकारियों ने कोर्ट के आदेश के बाद कहा कि वे आदेश का पालन करेंगे और कार्यालय का स्थानांतरण जल्द से जल्द सुनिश्चित किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, अब कार्यालय के लिए नए किराए के भवन की तलाश शुरू कर दी गई है।

हाईकोर्ट का यह आदेश शहर में सार्वजनिक संपत्ति और नागरिक अधिकारों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकारी विभाग और अधिकारी केवल अपने कार्यों के लिए सार्वजनिक भवनों का अस्थायी उपयोग कर सकते हैं, लेकिन जनता की सुविधा और अधिकारों का उल्लंघन किसी भी हाल में नहीं किया जा सकता।

अदालत के आदेश के बाद नागरिक संगठनों और स्थानीय निवासियों ने इसे सकारात्मक कदम के रूप में सराहा। उनका कहना है कि सामुदायिक केंद्र जैसे सार्वजनिक भवन का उपयोग सभी नागरिकों के लिए होना चाहिए, और सरकारी विभागों का कब्जा इसे अस्वीकार्य रूप से सीमित कर देता है।

इस प्रकार, राजस्थान हाईकोर्ट का यह आदेश न्यायिक अनुशासन और सार्वजनिक संपत्ति के संरक्षण का संदेश देता है। जेडीए को अपने कार्यालय का स्थानांतरण सुनिश्चित करना होगा और सामुदायिक केंद्र को जनता के लिए पूरी तरह से खोलना होगा, ताकि स्थानीय निवासियों और पत्रकार कॉलोनी के लोगों को इसकी सुविधाओं का लाभ मिल सके।