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राजस्थान क्रिकेट संघ में सीआरसी विवाद नया मोड़, वीडियो में देंखे एडहॉक कमेटी ने कन्वीनर कुमावत के खिलाफ उठाया मोर्चा

 

राजस्थान क्रिकेट संघ में लंबे समय से चल रहे सीआरसी विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। विपक्षी गुट द्वारा सरकार पर घेराव के बाद अब सरकार की ओर से गठित एडहॉक कमेटी के चार सदस्यों ने मौजूदा कन्वीनर दीनदयाल कुमावत के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। एडहॉक कमेटी के सदस्य धनंजय सिंह खींवसर, आशीष तिवाड़ी, पिंकेश जैन और मोहित यादव ने सहकारिता विभाग के रजिस्ट्रार को पत्र लिखकर कुमावत के खिलाफ कार्रवाई करने और नए कन्वीनर की नियुक्ति की मांग की है।

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कमेटी के सदस्यों ने अपने पत्र में कहा कि 11 फरवरी 2026 को कुमावत ने राजस्थान क्रिकेट संघ को राजस्थान सार्वजनिक न्यास अधिनियम, 1959 की धारा 17(2) के तहत ट्रस्ट के रूप में पंजीकृत कराने के लिए आवेदन किया। उनका कहना है कि इस प्रकार ट्रस्ट के रूप में पंजीकरण का आवेदन नियमों के विपरीत और पूरी तरह गलत है। सदस्यों ने यह भी आरोप लगाया कि कुमावत ने यह कदम संघ के संचालन और पंजीकरण प्रक्रिया में अनियमितता को जन्म देने के लिए उठाया।

विश्लेषकों का कहना है कि यह विवाद राजस्थान क्रिकेट संघ के अंदरूनी राजनीति और सत्ता संघर्ष को उजागर करता है। पिछले कुछ महीनों में सीआरसी विवाद लगातार बढ़ता रहा है, और अब एडहॉक कमेटी के अंदर ही विभिन्न मतभेद सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस मामले को शीघ्र और पारदर्शी तरीके से नहीं सुलझाया गया, तो यह संघ के कामकाज और आगामी क्रिकेट आयोजनों को प्रभावित कर सकता है।

राजस्थान क्रिकेट संघ का कहना है कि संघ की गतिविधियों और पंजीकरण प्रक्रियाओं को लेकर नियमों का पालन किया गया है। हालांकि, एडहॉक कमेटी के चार सदस्यों ने यह दावा किया है कि कन्वीनर की भूमिका विवादास्पद हो गई है और संघ के संचालन के लिए नए कन्वीनर की नियुक्ति आवश्यक है।

राजनीतिक हलकों में भी यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार ने संघ में सही दिशा में हस्तक्षेप नहीं किया और विवाद को बढ़ने दिया। वहीं, समर्थक दलों का कहना है कि एडहॉक कमेटी के भीतर मतभेद को खत्म करना और संघ की कार्यप्रणाली को मजबूत करना आवश्यक है।

सहकारिता विभाग के रजिस्ट्रार ने अभी तक इस मामले में आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। अधिकारियों का कहना है कि पत्र के आधार पर नियमों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। meanwhile, क्रिकेट प्रेमियों और संघ के सदस्यों में इस मामले को लेकर उत्सुकता बनी हुई है।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि अगर कानूनी रूप से इस विवाद का समाधान नहीं निकला, तो यह राज्य में क्रिकेट प्रशासन और खेल जगत की छवि पर असर डाल सकता है। इसलिए सभी पक्षों से अपेक्षा है कि इस मामले को जल्द से जल्द पारदर्शी तरीके से सुलझाया जाए।इस तरह, राजस्थान क्रिकेट संघ का सीआरसी विवाद नए मोड़ पर है और आगामी दिनों में इसके राजनीतिक और प्रशासनिक नतीजों पर नजर रखी जा रही है।