सवाई मानसिंह अस्पताल में आईसीयू की बदहाल स्थिति, वीडियो में देखें नए बने वार्ड में पानी टपकने से मरीज और स्टाफ परेशान
जयपुर के सवाई मानसिंह (एसएमएस) अस्पताल में मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में व्यवस्थाओं की पोल एक बार फिर खुल गई है। खासतौर पर आईसीयू जैसे अति महत्वपूर्ण वार्डों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। कुछ दिन पहले ट्रॉमा सेंटर भवन में स्थित पोलीट्रोमा आईसीयू वार्ड में पानी भरने की घटना सामने आई थी और अब मुख्य भवन में बने टूडीई (2DE) आईसीयू वार्ड में छत से पानी टपकने की समस्या ने प्रशासन की लापरवाही उजागर कर दी है।
हैरानी की बात यह है कि टूडीई आईसीयू वार्ड का निर्माण पिछले साल मई-जून में ही पूरा हुआ था। यानी महज एक साल के भीतर ही नए वार्ड की हालत खराब हो गई। छत से लगातार पानी टपकने के कारण न केवल मरीजों को परेशानी हो रही है, बल्कि वार्ड में काम करने वाले डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के लिए भी हालात बेहद कठिन हो गए हैं। इस घटना ने अस्पताल में हुए नए निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आईसीयू में कार्यरत स्टाफ का कहना है कि टूडीई आईसीयू वार्ड में पिछले कई महीनों से लगातार पानी का रिसाव हो रहा है। बरसात के दिनों में स्थिति और भी बदतर हो जाती है। पानी टपकने की वजह से आईसीयू के करीब 10 बेड मरीजों के इस्तेमाल में नहीं आ पा रहे हैं। इससे गंभीर मरीजों को भर्ती करने में परेशानी हो रही है और कई बार उन्हें अन्य वार्डों या अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है।
स्वास्थ्यकर्मियों के अनुसार, आईसीयू जैसे संवेदनशील वार्ड में स्वच्छता और सुरक्षित वातावरण बेहद जरूरी होता है। पानी टपकने से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है और महंगे मेडिकल उपकरणों को भी नुकसान पहुंच सकता है। इसके बावजूद इस गंभीर समस्या पर संबंधित विभागों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।
स्टाफ का आरोप है कि इस समस्या को लेकर पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों सहित अस्पताल प्रशासन और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को कई बार लिखित और मौखिक रूप से अवगत कराया जा चुका है। मरम्मत कराने की मांग भी की गई, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। अधिकारियों की उदासीनता के चलते मरीजों और स्टाफ को मजबूरी में जोखिम भरे हालातों में काम करना पड़ रहा है।
लगातार सामने आ रही इन घटनाओं से एसएमएस अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल उठने लगे हैं। करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए जा रहे नए भवन और वार्ड अगर कुछ ही महीनों में खराब होने लगें, तो यह सरकारी सिस्टम और निर्माण एजेंसियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
फिलहाल मरीजों और स्टाफ को उम्मीद है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेगा और जल्द से जल्द आईसीयू की मरम्मत कराएगा, ताकि गंभीर मरीजों को बेहतर और सुरक्षित इलाज मिल सके। यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले समय में हालात और भी गंभीर हो सकते हैं।