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राजस्थान में स्वास्थ्य संस्थानों की स्थिति चिंताजनक, फुटेज में देंखे 64% केंद्रों पर एम्बुलेंस नहीं

 

राजस्थान के निचले स्तर पर बने स्वास्थ्य संस्थानों की स्थिति गंभीर चिंता का विषय बन गई है। हाल ही में स्वास्थ्य विभाग की टीमों द्वारा किए गए रैंडम सर्वे में खुलासा हुआ कि इन केंद्रों में न तो पर्याप्त फेकल्टी हैं और न ही दवाइयों की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध है।

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सर्वेक्षण के दौरान यह पता चला कि इन स्वास्थ्य संस्थानों में से 64 प्रतिशत केंद्रों पर एम्बुलेंस तक उपलब्ध नहीं है। वहीं स्वच्छता के मामले में भी स्थिति संतोषजनक नहीं है, लगभग 9 प्रतिशत केंद्रों में साफ-सफाई की स्थिति खराब पाई गई।

यह सर्वेक्षण एक बड़े पैमाने पर किया गया था। इसमें जोनल ज्वॉइंट डायरेक्टर, सीएमएचओ, डिप्टी सीएमएचओ, पीएमओ, ब्लॉक सीएमएचओ और मेडिकल ऑफिसर इंचार्ज (MOIC) सहित 500 से अधिक सदस्यों की टीम ने हिस्सा लिया।

जांच के दायरे में कुल 321 सब सेंटर, 161 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 56 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 1 सैटेलाइट हॉस्पिटल, 17 उप-जिला हॉस्पिटल और 3 जिला हॉस्पिटल शामिल थे। टीम ने हर संस्थान में उपलब्ध सुविधाओं, स्टाफिंग, दवाइयों और आपातकालीन सेवाओं का बारीकी से निरीक्षण किया।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि निचले स्तर पर स्वास्थ्य संस्थानों की यह स्थिति न केवल मरीजों के लिए जोखिम पैदा करती है, बल्कि राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे की मजबूती पर भी सवाल खड़ा करती है। एम्बुलेंस की कमी आपातकालीन मामलों में जीवन संकट का कारण बन सकती है।

सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार कई केंद्रों में फेकल्टी और नर्सिंग स्टाफ की भारी कमी है। कई स्थानों पर डॉक्टर उपलब्ध नहीं थे और मरीजों को उपचार में लंबा इंतजार करना पड़ा। दवाइयों की कमी के कारण मरीजों को आसपास के बड़े अस्पतालों में भेजना पड़ा, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं में और देरी हुई।

स्वच्छता की खराब स्थिति भी गंभीर है। 9 प्रतिशत केंद्रों में गंदगी और संक्रमण फैलने का खतरा मौजूद था। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि स्वच्छता और संक्रमण नियंत्रण के उपाय तुरंत लागू किए जाएं।

स्वास्थ्य विभाग ने इस सर्वेक्षण के आधार पर सुधारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया है। अधिकारियों का कहना है कि एम्बुलेंस की उपलब्धता, फेकल्टी की संख्या और दवाइयों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना प्राथमिकता होगी।

राजस्थान में ग्रामीण और निचले स्तर के स्वास्थ्य केंद्र राज्य के स्वास्थ्य ढांचे की रीढ़ माने जाते हैं। इन केंद्रों में सुधार से न केवल आपातकालीन सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ेगी, बल्कि रोगियों की संतुष्टि और राज्य में स्वास्थ्य सुरक्षा की स्थिति भी बेहतर होगी।

इस सर्वेक्षण से यह स्पष्ट हुआ है कि सरकार और स्वास्थ्य विभाग को निचले स्तर के स्वास्थ्य केंद्रों के लिए विशेष पैकेज और निगरानी प्रणाली लागू करने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो ग्रामीण जनता को गंभीर स्वास्थ्य जोखिम का सामना करना पड़ सकता है।