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राज्यपाल अभिभाषण पर बहस के दौरान सदन में गरमाया माहौल, वीडियो में देखें कांग्रेस विधायक शांति धारीवाल की टिप्पणी पर विवाद

 

राजस्थान विधानसभा में बुधवार को राज्यपाल के अभिभाषण पर चल रही बहस के दौरान माहौल उस वक्त गरमा गया, जब पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक शांति धारीवाल की एक टिप्पणी को लेकर विवाद खड़ा हो गया। बहस के दौरान धारीवाल के मुंह से निकले आपत्तिजनक शब्दों पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई, जिसके बाद सभापति ने उन्हें सदन की कार्यवाही से हटाने के निर्देश दिए।

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दरअसल, बहस के दौरान शांति धारीवाल राज्य में युवाओं के रोजगार और स्किल ट्रेनिंग के मुद्दे पर सरकार को घेर रहे थे। उन्होंने कहा कि यदि लाखों युवाओं को स्किल ट्रेनिंग देकर रोजगार योग्य नहीं बनाया गया, तो यही युवा आबादी भविष्य में सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। उन्होंने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए युवाओं के भविष्य को लेकर चिंता जताई।

इसी दौरान सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने बिना नाम लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा, “इस देश में एक युवक को छोड़कर सबको रोजगार मिल गया।” इस टिप्पणी के बाद सदन में शोरगुल बढ़ गया और विपक्ष ने इसका विरोध किया।

गर्ग की बात का जवाब देते हुए धारीवाल ने कहा, “आपकी बात आधी समझ आती है।” इसी क्रम में उनकी ओर से एक आपत्तिजनक शब्द का प्रयोग हो गया, जिस पर सत्ता पक्ष के विधायकों ने तुरंत आपत्ति जताई। सदन में कुछ देर के लिए हंगामे की स्थिति बन गई।

धारीवाल के बोलने के बाद सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने सभापति से कहा कि शांति धारीवाल आदतन इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करते हैं और उन्होंने आज फिर सदन की गरिमा के खिलाफ शब्द बोले हैं। उन्होंने मांग की कि उक्त शब्दों को कार्यवाही से हटाया जाए।

मामले को गंभीरता से लेते हुए सभापति ने आपत्तिजनक शब्दों को सदन की कार्यवाही से हटाने के आदेश दिए। इसके बाद बहस आगे बढ़ाई गई, लेकिन घटना को लेकर सदन में चर्चा जारी रही।

उल्लेखनीय है कि शांति धारीवाल पहले भी विधानसभा में आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल को लेकर विवादों में रह चुके हैं। पूर्व में भी ऐसी ही घटना के बाद सदन में भारी हंगामा हुआ था और उन्हें माफी मांगनी पड़ी थी।

इस ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर सदन की भाषा और मर्यादा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा जैसे मंच पर जनप्रतिनिधियों को संयमित और गरिमापूर्ण भाषा का प्रयोग करना चाहिए, ताकि लोकतांत्रिक परंपराओं की मर्यादा बनी रहे।