ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर सेना का सख्त संदेश, वीडियो में जाने “आतंक के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी”
ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर भारतीय सेना ने एक बार फिर आतंकवाद के खिलाफ अपने सख्त रुख को दोहराया है। जयपुर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सेना ने कहा कि यह अभियान केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं था, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की रणनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ था।सेना के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि पाकिस्तान में मौजूद किसी भी आतंकवादी ठिकाने को सुरक्षित नहीं माना जा सकता। सेना ने कहा, “यह ऑपरेशन अंत नहीं, बल्कि शुरुआत थी। भारत आतंकवाद के खिलाफ लड़ता रहेगा।”
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सेना ने अभियान से जुड़े कुछ अहम आंकड़े भी साझा किए। जानकारी के मुताबिक, ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान के 100 से अधिक सैनिकों और 100 से अधिक आतंकियों की मौत हुई। सेना ने इसे एक निर्णायक कार्रवाई बताया, जिसका उद्देश्य सीमा पार से होने वाली आतंकी गतिविधियों को रोकना था।सेना ने यह भी स्पष्ट किया कि इस पूरे अभियान का उद्देश्य केवल जवाबी कार्रवाई नहीं था, बल्कि भविष्य में ऐसे हमलों को रोकने के लिए एक मजबूत संदेश देना भी था। अधिकारियों ने कहा कि पहलगाम हमले में मारे गए निर्दोष नागरिकों की क्षति को कोई भी कार्रवाई वापस नहीं ला सकती, लेकिन भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सेना के अधिकारियों ने कहा, “हम अपने उन भाई-बहनों को वापस नहीं ला सकते जिन्हें हमने खो दिया, लेकिन हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि ऐसा हमला दोबारा न हो। हमारा उद्देश्य स्पष्ट था और ऑपरेशन के लिए पूरी छूट दी गई थी।”सेना ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत की सुरक्षा नीति अब अधिक सक्रिय और सख्त हो चुकी है। आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई केवल प्रतिक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि अब इसे रोकने के लिए पहले से रणनीतिक कदम उठाए जा रहे हैं।
ऑपरेशन सिंदूर को लेकर सेना का यह बयान ऐसे समय में आया है जब सीमा सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दे पर क्षेत्रीय तनाव लगातार चर्चा में रहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सैन्य कार्रवाइयों का उद्देश्य न केवल सुरक्षा सुनिश्चित करना है, बल्कि यह भी संदेश देना है कि भारत अपनी सीमाओं और नागरिकों की सुरक्षा के लिए किसी भी स्तर तक जा सकता है।जयपुर में आयोजित इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने ऑपरेशन की रणनीति और उसके प्रभावों पर भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी ऐसी किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए भारतीय सेना पूरी तरह तैयार है। कुल मिलाकर, ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर सेना का यह संदेश स्पष्ट करता है कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति सख्त और निरंतर बनी रहेगी, और किसी भी प्रकार की आतंकी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।