चंबल अभयारण्य में अवैध खनन पर सख्त सुप्रीम कोर्ट, लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई के संकेत
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई की। अदालत ने साफ कहा कि राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य जैसे संरक्षित क्षेत्र में किसी भी प्रकार का अवैध खनन वन्यजीवों और उनके प्राकृतिक आवास के लिए गंभीर खतरा है।
यह अभयारण्य राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में फैला हुआ है और जैव विविधता के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि इस क्षेत्र में वन्यजीवों के “हेबिटाट” (प्राकृतिक आवास) को नुकसान पहुंचाने वाला कोई भी कार्य गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
अधिकारियों की जवाबदेही:
अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि संबंधित अधिकारी इस तरह की गतिविधियों को रोकने में विफल रहते हैं, तो उनके खिलाफ कठोर कदम उठाए जा सकते हैं। कोर्ट का यह रुख पर्यावरण संरक्षण और कानून के सख्त अनुपालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है।
पर्यावरण संरक्षण पर जोर:
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्राकृतिक संसाधनों और वन्यजीवों की सुरक्षा सरकार और प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। अवैध खनन न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र को भी गंभीर रूप से प्रभावित करता है।