JLF में बोले शोभा डे और विश्वनाथन आनंद, वीडियो में देखें ईरान मुद्दे से लेकर AI और चेस तक पर रखे बेबाक विचार
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) के दौरान दूसरे दिन साहित्य, समाज और समकालीन मुद्दों पर चर्चाओं का दौर जारी रहा। फेस्टिवल में राइटर और कॉलमिस्ट शोभा डे ने ईरान के हालात पर खुलकर अपनी बात रखी, वहीं चेस ग्रैंडमास्टर विश्वनाथन आनंद ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल और चेस से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।
मीडिया से बातचीत के दौरान शोभा डे ने ईरान में महिलाओं और निर्दोष लोगों के साथ हो रहे व्यवहार पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ईरान में जो कुछ भी हो रहा है, वह पूरी तरह गलत है। महिलाओं और मासूम लोगों के साथ हो रहे अत्याचारों को देखकर हम आंखें बंद नहीं कर सकते। यह सिर्फ किसी एक देश का मामला नहीं है, बल्कि एक मानवीय मुद्दा है। शोभा डे ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हमारा फर्ज बनता है कि हम इसके खिलाफ आवाज उठाएं और प्रोटेस्ट करें।
उन्होंने यह भी कहा कि वह यह बात किसी सरकार या जियो-पॉलिटिक्स की परवाह किए बिना कह रही हैं। उनके अनुसार, जब मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा हो, तब चुप रहना सबसे बड़ी गलती होती है। शोभा डे की इस बेबाक टिप्पणी को लेकर फेस्टिवल में मौजूद दर्शकों और साहित्य प्रेमियों के बीच खासा ध्यान देखने को मिला।
वहीं, चेस ग्रैंडमास्टर विश्वनाथन आनंद ने JLF के लाइटनिंग किड सेशन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि वह खुद किसी सवाल का जवाब खोजने के लिए AI का सहारा नहीं लेते। आनंद के अनुसार, AI आपको बहुत आसानी से जवाब दे सकता है, लेकिन किसी भी समझदार इंसान के जवाब के पीछे का लॉजिक और सोच क्या है, यह जानना ज्यादा जरूरी होता है।
विश्वनाथन आनंद ने चेस से जुड़े अपने सफर, खेल के प्रति अपने एटीट्यूड और गुस्से पर भी खुलकर बात की। उन्होंने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि चेस सिर्फ एक खेल नहीं है, बल्कि यह धैर्य, रणनीति और आत्मनियंत्रण सिखाता है। हार और जीत दोनों को स्वीकार करना सीखना ही एक खिलाड़ी को आगे बढ़ाता है। उनके सत्र में बच्चों और युवाओं की बड़ी भागीदारी देखने को मिली।
इससे पहले JLF के दूसरे दिन की शुरुआत मॉर्निंग म्यूजिक सेशन से हुई, जिसमें प्रसिद्ध लोक गायिका भंवरी देवी ने अपनी शानदार प्रस्तुति दी। उनकी लोक धुनों और पारंपरिक गायन ने सुबह के माहौल को संगीतमय बना दिया और दर्शकों को राजस्थान की लोक संस्कृति से रूबरू कराया।
फेस्टिवल के फ्रंट लॉन में भी विभिन्न सत्रों और चर्चाओं का आयोजन हुआ, जहां साहित्य, समाज, राजनीति और कला से जुड़े कई विषयों पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का यह दिन विचारों की विविधता, खुली बहस और सांस्कृतिक रंगों से भरपूर रहा, जिसने एक बार फिर JLF को वैश्विक स्तर का साहित्यिक मंच साबित किया।