जयपुर में नवजात बेटी की हत्या का सनसनीखेज खुलासा, वीडियो में जाने बेटे की चाह में पिता ने घोंटा गला, अस्पताल से उठाकर ले गया था बाहर
राजस्थान की राजधानी जयपुर में नवजात बच्ची की हत्या के मामले में पुलिस ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। जांच में सामने आया कि तीसरी बार भी बेटी के जन्म से नाराज पिता ने ही अपनी नवजात बच्ची की गला दबाकर हत्या कर दी। घटना ने समाज में बेटा-बेटी के भेदभाव को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपी रवि कुमार, निवासी बिछपड़ी, थाना नीमराना, जिला कोटपूतली-बहरोड़, ने 27 जुलाई को अपनी पत्नी कोमल यादव को प्रसव के लिए जयपुर के अस्पताल में भर्ती कराया था। 28 जुलाई को कोमल ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। परिवार के लिए यह तीसरी संतान थी और तीनों बेटियां थीं।
तड़के वार्ड से बाहर ले जाकर की हत्या
पुलिस जांच में सामने आया कि 29 जुलाई की तड़के करीब 4 बजे रवि कुमार नवजात बच्ची को वार्ड से बाहर लेकर गया। आरोप है कि उसने वहां बच्ची का गला दबाकर उसकी हत्या कर दी और बाद में वार्ड में लौट आया।घटना का खुलासा होने के बाद अस्पताल प्रशासन ने तत्काल पुलिस को सूचना दी। अस्पताल की नर्स सुनीता शर्मा की शिकायत पर चंदवाजी थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) के तहत हत्या का मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी पिता को गिरफ्तार कर लिया।
मां बोली- कभी बेटियों में भेदभाव नहीं देखा
घटना के बाद मृत बच्ची की मां कोमल यादव ने कहा कि उन्होंने कभी बेटे और बेटी में कोई फर्क नहीं किया। उन्होंने बताया कि उनके पति ने भी इससे पहले दोनों बेटियों के साथ कभी भेदभाव नहीं किया था।कोमल ने कहा, "मुझे कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ कि उन्हें बेटियों से कोई नाराजगी है। तीसरी बेटी के जन्म पर भी हम सभी संतुष्ट थे। मुझे अंदाजा भी नहीं था कि वह ऐसा खौफनाक कदम उठा सकते हैं।"
पूछताछ में आरोपी ने कबूला जुर्म
पुलिस पूछताछ में आरोपी रवि कुमार ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। उसने बताया कि उसकी पहले से दो बेटियां थीं और इस बार उसे बेटे के जन्म की उम्मीद थी। तीसरी बार भी बेटी होने से वह बेहद नाराज हो गया और गुस्से में आकर उसने यह वारदात कर दी।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है।
समाज के लिए गंभीर संदेश
यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि समाज में आज भी मौजूद लैंगिक भेदभाव की सोच को उजागर करती है। बेटियों को लेकर संकीर्ण मानसिकता कई बार ऐसे दर्दनाक अपराधों का कारण बन जाती है। सरकार और समाज लगातार "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ" जैसे अभियान चला रहे हैं, लेकिन इस तरह की घटनाएं बताती हैं कि मानसिकता बदलना अभी भी सबसे बड़ी चुनौती है।फिलहाल आरोपी न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहा है, जबकि नवजात की मौत से परिवार और अस्पताल स्टाफ सदमे में है।