Jaipur में शोर का रियल टाइम डेटा अब अप्रैल से मिलेगा, चार स्थानों पर लगेंगे ध्वनि मॉनिटरिंग केंद्र
प्रदेश की राजधानी Jaipur में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण पर अब तकनीक के जरिए नजर रखी जाएगी। शहर में अप्रैल महीने से रियल टाइम परिवेशी ध्वनि (एंबिएंट नॉइज़) मॉनिटरिंग की शुरुआत होने जा रही है। इसके तहत चार अलग-अलग स्थानों पर अत्याधुनिक ध्वनि जांच केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जिनके लिए स्थानों का चयन भी कर लिया गया है।
अब तक शहर में वायु गुणवत्ता की निगरानी तो की जा रही थी, लेकिन ध्वनि प्रदूषण के स्तर की नियमित और रियल टाइम मॉनिटरिंग की व्यवस्था नहीं थी। अप्रैल से शुरू होने वाली इस नई प्रणाली के जरिए आम लोग भी जान सकेंगे कि उनके आसपास कितना शोर है और वह तय मानकों के भीतर है या नहीं।
चार स्थानों पर स्थापित होंगे सेंटर
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, शहर के अलग-अलग जोन को ध्यान में रखते हुए चार प्रमुख स्थानों का चयन किया गया है। इन केंद्रों पर अत्याधुनिक साउंड मॉनिटरिंग उपकरण लगाए जाएंगे, जो 24 घंटे ध्वनि स्तर रिकॉर्ड करेंगे। यह डेटा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेगा, जिससे आम नागरिक और संबंधित विभाग वास्तविक समय में स्थिति देख सकेंगे।
इन केंद्रों की स्थापना का उद्देश्य रिहायशी, व्यावसायिक और यातायात प्रभावित क्षेत्रों में शोर के स्तर का तुलनात्मक अध्ययन करना है। इससे यह पता चल सकेगा कि किन इलाकों में ध्वनि प्रदूषण तय मानकों से अधिक है और वहां नियंत्रण के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए।
वायु प्रदूषण की तर्ज पर होगी निगरानी
जैसे शहर में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) के जरिए वायु प्रदूषण की जानकारी सार्वजनिक की जाती है, उसी तरह अब ध्वनि प्रदूषण के आंकड़े भी रियल टाइम उपलब्ध होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल प्रशासन को कार्रवाई में आसानी होगी, बल्कि नागरिकों में भी जागरूकता बढ़ेगी।
ध्वनि प्रदूषण का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ता है। लगातार तेज शोर के संपर्क में रहने से सुनने की क्षमता पर प्रभाव, मानसिक तनाव, नींद में बाधा और उच्च रक्तचाप जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में यह पहल शहरवासियों के स्वास्थ्य के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
नियमों के पालन में मिलेगी मदद
प्रशासन का कहना है कि रियल टाइम डेटा के आधार पर नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जा सकेगी। खासकर रात्रि के समय लाउडस्पीकर, तेज संगीत या निर्माण कार्य से होने वाले शोर पर निगरानी रखी जाएगी।
अधिकारियों के मुताबिक, अप्रैल से ये चारों केंद्र पूरी तरह संचालित हो जाएंगे और चरणबद्ध तरीके से भविष्य में अन्य क्षेत्रों में भी ऐसे केंद्र स्थापित किए जा सकते हैं।
कुल मिलाकर, जयपुर में ध्वनि प्रदूषण की रियल टाइम मॉनिटरिंग की यह पहल शहर को अधिक व्यवस्थित और स्वास्थ्य अनुकूल बनाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।