×

नीदरलैंड में गूंजी राजस्थान की लोकधुन, वीडियो में देंखे पीएम मोदी के स्वागत में प्रस्तुत हुआ ‘पधारो म्हारे देस’

 

राजस्थान की समृद्ध लोकसंस्कृति और संगीत की मधुर परंपरा ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी खास पहचान बनाई है। जयपुर की प्रसिद्ध गायिका और कलाकार Manisha A. Agrawal द्वारा प्रस्तुत लोकप्रिय राजस्थानी गीत ‘पधारो म्हारे देस’ हाल ही में नीदरलैंड में आयोजित एक विशेष स्वागत समारोह का केंद्र बना, जहां भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi का अभिनंदन किया गया।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नीदरलैंड दौरे के दौरान आयोजित इस कार्यक्रम में जब राजस्थान की लोकधुन ‘पधारो म्हारे देस’ गूंजी, तो वहां मौजूद लोगों को भारतीय संस्कृति और राजस्थान की परंपराओं की झलक देखने को मिली। इस प्रस्तुति ने न केवल कार्यक्रम को सांस्कृतिक रंगों से भर दिया, बल्कि वैश्विक मंच पर भारतीय लोकसंगीत की खूबसूरती को भी उजागर किया।

<a style="border: 0px; overflow: hidden" href=https://youtube.com/embed/DQXFV5UpPk4?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/DQXFV5UpPk4/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden;" width="640">

‘पधारो म्हारे देस’ राजस्थान की पहचान माने जाने वाले उन लोकगीतों में शामिल है, जो मेहमाननवाजी, संस्कृति और मिट्टी की खुशबू को दर्शाते हैं। यह गीत वर्षों से राजस्थान की सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक माना जाता रहा है। नीदरलैंड में इसकी प्रस्तुति ने विदेशी धरती पर भारतीय परंपराओं का विशेष प्रभाव छोड़ा।इस उपलब्धि ने जयपुर सहित पूरे राजस्थान को गौरवान्वित किया है। सांस्कृतिक जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि इस तरह के अवसर राज्य की लोककला और लोकसंगीत को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम में मौजूद भारतीय समुदाय और विदेशी मेहमानों ने भी इस प्रस्तुति की सराहना की। राजस्थानी संगीत की मधुरता और पारंपरिक अंदाज ने समारोह में एक अलग ही सांस्कृतिक माहौल बना दिया।विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की सॉफ्ट पावर को मजबूत करने में लोकसंगीत और क्षेत्रीय संस्कृति की अहम भूमिका होती है। ऐसे आयोजनों के जरिए दुनिया को भारत की विविधता और सांस्कृतिक समृद्धि से परिचित कराया जाता है। जयपुर की कलाकार मनीषा ए. अग्रवाल की यह प्रस्तुति न केवल उनके व्यक्तिगत करियर की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, बल्कि यह राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत के लिए भी गर्व का क्षण बन गई है।