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गलता तीर्थ में रोप-वे की तैयारी तेज: अरावली की वादियों में बढ़ेगा पर्यटन, प्रशासन ने बनाई रूपरेखा की दिशा

 

अरावली की सुरम्य पहाड़ियों के बीच स्थित ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के केंद्र गलता तीर्थ में जल्द ही रोप-वे संचालन की दिशा में बड़ी प्रगति देखने को मिल सकती है। गालव ऋषि की तपोस्थली माने जाने वाले इस पवित्र स्थल को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से जोड़ने की योजना पर प्रशासन ने रूपरेखा तैयार करने की प्रक्रिया तेज कर दी है।

प्रशासनिक स्तर पर रोप-वे परियोजना को लेकर दिए गए निर्देशों के बाद संबंधित विभागों में हलचल बढ़ गई है। अधिकारियों के अनुसार, परियोजना की तकनीकी व्यवहार्यता, पर्यावरणीय प्रभाव और सुरक्षा मानकों पर विस्तृत अध्ययन के बाद ही अंतिम योजना को मंजूरी दी जाएगी।

यह प्रस्तावित रोप-वे जयपुर के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों में से एक Galta Ji, Jaipur को और अधिक सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। वर्तमान में इस क्षेत्र तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं और पर्यटकों को पहाड़ी मार्गों से होकर गुजरना पड़ता है, जिसमें बुजुर्गों और पर्यटकों को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ता है।

परियोजना का उद्देश्य न केवल श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ाना है, बल्कि पर्यटन को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है। प्रशासन का मानना है कि रोप-वे शुरू होने के बाद गलता क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है, जिससे स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलेगा।

अरावली की प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्व को देखते हुए यह परियोजना बेहद संवेदनशील मानी जा रही है। इसलिए वन विभाग और पर्यावरण विशेषज्ञों की राय को भी योजना में शामिल किया जा रहा है, ताकि विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बना रहे।

स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया है। उनका कहना है कि रोप-वे शुरू होने से क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियां बढ़ेंगी और छोटे व्यवसायों जैसे प्रसाद, हस्तशिल्प और परिवहन सेवाओं को भी फायदा मिलेगा।

पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह परियोजना समय पर पूरी होती है, तो गलता तीर्थ राजस्थान के उन चुनिंदा धार्मिक स्थलों में शामिल हो सकता है जहां आधुनिक सुविधा और प्राचीन विरासत का सुंदर संगम देखने को मिलेगा।

हालांकि, कुछ विशेषज्ञों ने यह भी सुझाव दिया है कि निर्माण कार्य के दौरान पहाड़ी संरचना और प्राकृतिक जल स्रोतों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना जरूरी होगा, क्योंकि यह क्षेत्र ऐतिहासिक और पारिस्थितिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है।