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राजस्थान में SIR प्रक्रिया पर सियासत, कांग्रेस ने लगाए आरोप, बीजेपी ने किया खारिज

 

राजस्थान में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को लेकर सियासत तेज हो गई है। प्रशासन ने मतदाता सूची में आपत्ति दर्ज कराने की समय सीमा 19 जनवरी तक बढ़ा दी है, ताकि सभी नागरिकों को अपनी शिकायतों और संशोधनों के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

इस बीच, कांग्रेस के विधायक और विधानसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक रफीक खान ने SIR प्रक्रिया में धांधली और पक्षपात का आरोप लगाते हुए भाजपा सरकार पर जमकर हमला बोला। रफीक खान ने कहा कि भाजपा की दिल्ली वाली केंद्र सरकार के निर्देश और स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत से मतदाता सूची में गड़बड़ी की जा रही है, जिससे विपक्ष और आम जनता की आवाज दबाई जा रही है।

उन्होंने जोर देते हुए कहा, "यह प्रक्रिया केवल संख्या बढ़ाने या घटाने का खेल नहीं है। मतदाता सूची में गड़बड़ी किसी भी सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी के खिलाफ है।" रफीक खान ने प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से अपील की कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से संपन्न हो।

वहीं, भाजपा की ओर से इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया गया है। पार्टी के नेताओं ने कहा कि SIR प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना और चुनाव में निष्पक्षता सुनिश्चित करना है। उनका कहना है कि कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोप राजनीतिक और प्रचार उद्देश्य से फैलाए जा रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि SIR जैसे अभियान आमतौर पर मतदाता सूची की त्रुटियों और अनुपस्थित नामों को सही करने के लिए किए जाते हैं। लेकिन जब इस प्रक्रिया पर राजनीतिक आरोप लगते हैं, तो यह लोकतांत्रिक विश्वास और मतदाता का भरोसा प्रभावित कर सकता है।

स्थानीय मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी SIR प्रक्रिया को लेकर बहस और प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। कई लोग इसे प्रशासन की कोशिश मानते हैं कि सभी मतदाताओं को सही और अद्यतन सूची मिले, जबकि कुछ लोग इसे विपक्ष और राजनीतिक दलों के बीच राजनीतिक टकराव के रूप में देख रहे हैं।

राजस्थान विधानसभा में कांग्रेस नेता रफीक खान ने चेतावनी दी कि यदि मतदाता सूची में अनियमितता या धांधली पाई गई, तो विपक्ष सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि जनता के अधिकारों की रक्षा करना हर राजनीतिक दल की जिम्मेदारी है।

इस विवाद के बीच, प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे आपत्तियों और संशोधनों के लिए समय पर आवेदन करें और किसी भी तरह की अफवाह या गलत सूचना से प्रभावित न हों। अधिकारियों ने कहा कि SIR प्रक्रिया पारदर्शिता और नियमों के अनुसार पूरी की जा रही है।

इस प्रकार, राजस्थान में SIR प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक तापमान बढ़ता जा रहा है। मतदाता सूची के अद्यतन और नाम कटने-जोड़ने के मामलों में पारदर्शिता की मांग के साथ लोकतांत्रिक संस्थाओं और प्रशासन की जवाबदेही पर भी सवाल उठ रहे हैं। आगामी दिनों में इस मामले पर संसदीय बहस, मीडिया कवरेज और सामाजिक प्रतिक्रियाएं दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।