राजस्थान में बढ़ते कर्ज पर सियासत तेज: टीकाराम जूली ने भजनलाल सरकार से मांगा जवाब
राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर आर्थिक मुद्दों को लेकर घमासान तेज हो गया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राज्य पर बढ़ते कर्ज और वित्तीय स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार न सिर्फ कर्ज के बोझ को बढ़ा रही है, बल्कि राज्य को मिलने वाले टैक्स के हिस्से में भी कमी आ रही है, जिससे प्रदेश की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है।
“राज्य को उसका हक तक नहीं मिल रहा”
टीकाराम जूली ने मुख्यमंत्री के हालिया दिल्ली दौरे पर तंज कसते हुए कहा कि बार-बार यह दावा किया जाता है कि दिल्ली से राज्य के लिए लाभ लेकर आते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि राजस्थान को उसके हिस्से का टैक्स भी पूरा नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय करों और अन्य मदों में राज्य को अपेक्षित राशि नहीं मिल रही, जिससे वित्तीय संतुलन बिगड़ रहा है।
3 साल में 5 साल जितना कर्ज
नेता प्रतिपक्ष ने सरकार पर कर्ज लेने को लेकर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने अपने पूरे 5 साल के कार्यकाल में करीब 2.26 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लिया था, जबकि वर्तमान भाजपा सरकार लगभग 3 साल में ही 2.22 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लेने जा रही है। जूली ने सवाल उठाया कि इतनी तेजी से बढ़ते कर्ज के बावजूद सरकार वित्तीय प्रबंधन के दावे कैसे कर सकती है।
पेंशन, सब्सिडी और विकास कार्य प्रभावित
जूली ने आरोप लगाया कि बढ़ते कर्ज का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को समय पर पेंशन नहीं मिल रही, किसानों को सब्सिडी में देरी हो रही है और कई विकास कार्य ठप पड़े हैं। उनका कहना है कि राज्य की आय का बड़ा हिस्सा अब कर्ज के ब्याज चुकाने में खर्च हो रहा है, जिससे विकास पर खर्च घटता जा रहा है।
1900 करोड़ के फंड पर संकट
इस मुद्दे को और गंभीर बताते हुए जूली ने कहा कि पंचायत चुनाव समय पर नहीं होने के कारण केंद्र से मिलने वाला लगभग 1900 करोड़ रुपये का फंड अटक सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह फंड नहीं मिला तो ग्रामीण विकास से जुड़ी कई योजनाएं प्रभावित होंगी और इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा।
सरकार पर साधा निशाना
नेता प्रतिपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार सिर्फ भाषण और दौरों में व्यस्त है, जबकि राज्य की वित्तीय स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को इस मुद्दे पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए और यह बताना चाहिए कि राज्य के हिस्से का पैसा क्यों नहीं मिल पा रहा।
बढ़ती सियासी तकरार
राजस्थान में बढ़ते कर्ज और केंद्र से मिलने वाले फंड को लेकर अब सियासी तकरार तेज हो गई है। विपक्ष जहां सरकार पर वित्तीय कुप्रबंधन का आरोप लगा रहा है, वहीं सरकार इन आरोपों का जवाब देने की तैयारी में है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गर्मा सकता है।
फिलहाल, राज्य की आर्थिक स्थिति और बढ़ते कर्ज को लेकर उठे सवालों ने प्रदेश की राजनीति को नया मुद्दा दे दिया है, जिस पर अब सत्ता और विपक्ष आमने-सामने नजर आ रहे हैं।