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IAS प्रमोशन विवाद पर राजस्थान में सियासत तेज, वीडियो में देखें राजेंद्र राठौड़ का गहलोत पर तंज—‘ट्वीट-ट्वीट खेलते हैं’

 

राजस्थान में अन्य सेवाओं से भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में होने वाले प्रमोशन को लेकर सियासत गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की टिप्पणी के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। इस मुद्दे पर पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ ने गहलोत पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके पास कोई ठोस तर्क नहीं है और वे केवल “ट्वीट-ट्वीट खेलते हैं।”

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राठौड़ ने कहा कि संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने चार अधिकारियों के नाम IAS प्रमोशन के लिए तय कर दिए हैं। इन नामों पर कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DOPT) की मुहर भी लग चुकी है, लेकिन राज्य सरकार स्तर पर पिछले करीब एक महीने से प्रमोशन की प्रक्रिया अटकी हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सभी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं तो फिर देरी क्यों हो रही है।

जानकारी के अनुसार, UPSC में पिछले वर्ष 22 और 23 दिसंबर को कुल 20 अधिकारियों के इंटरव्यू आयोजित किए गए थे। इन अधिकारियों में केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के दामाद अजय कुमार आर्य का नाम भी शामिल है। इस कारण यह मामला राजनीतिक रूप से और अधिक संवेदनशील बन गया है।

गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने हाल ही में इस मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए प्रमोशन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए थे। उनके बयान के बाद भाजपा नेताओं ने पलटवार शुरू कर दिया है। भाजपा का कहना है कि कांग्रेस इस मुद्दे को बेवजह राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रही है।

वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि IAS प्रमोशन से जुड़ा यह मामला प्रशासनिक प्रक्रिया से ज्यादा अब राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। राज्य में नौकरशाही से जुड़े फैसलों का सीधा असर प्रशासनिक कामकाज पर पड़ता है, इसलिए इस तरह की देरी पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार स्तर पर फाइल लंबित होने के कारण संबंधित अधिकारियों के प्रमोशन आदेश जारी नहीं हो पाए हैं। हालांकि, इस देरी के पीछे के वास्तविक कारणों को लेकर अभी तक आधिकारिक रूप से कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजस्थान की राजनीति में बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। अब सभी की नजर राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी है कि आखिर इन प्रमोशन आदेशों को कब तक जारी किया जाता है।