कोटा-बीकानेर अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत पर सियासत गरमाई, दो मिनट के वीडियो में जाने गहलोत ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
राजस्थान में कोटा और बीकानेर के सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत के मामलों को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री Ashok Gehlot ने राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठाते हुए स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति को लेकर तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने इन घटनाओं की जिम्मेदारी तय कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
सोशल मीडिया पोस्ट से साधा निशाना
Ashok Gehlot ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि प्रदेश का स्वास्थ्य महकमा गंभीर संकट से गुजर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य व्यवस्था “वेंटिलेटर पर” पहुंच चुकी है और गरीब मरीजों की जिंदगी के साथ लापरवाही की जा रही है।गहलोत ने अपने बयान में कहा कि यह स्थिति बेहद चिंताजनक है और इससे जनता का भरोसा सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं से डगमगाने लगा है।
कोटा मेडिकल कॉलेज में मौतों पर उठाए सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में हुई घटना का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ है कि पांच प्रसूताओं की मौत इलाज में लापरवाही के कारण हुई है, जो बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने इसे “विचलित करने वाला और अक्षम्य” बताते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि सिस्टम की असफलता का सबूत हैं।
“संस्थागत हत्याएं” बताकर जताई नाराजगी
Ashok Gehlot ने अपने बयान में इन मौतों को “संस्थागत हत्याएं” तक करार दे दिया। उनका कहना है कि यह सामान्य मौतें नहीं हैं, बल्कि व्यवस्था की घोर संवेदनहीनता का परिणाम हैं।उन्होंने सरकार से मांग की कि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों और चिकित्सकीय स्टाफ पर तत्काल कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर फिर शुरू हुई बहस
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद राजस्थान की स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। विपक्ष लगातार सरकार पर लापरवाही और बदहाल चिकित्सा सेवाओं का आरोप लगा रहा है, जबकि सरकार की ओर से मामले की जांच और सुधारात्मक कदमों की बात कही जा रही है।विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी अस्पतालों में संसाधनों की कमी, स्टाफ की अनुपलब्धता और प्रबंधन की खामियां इस तरह की घटनाओं के पीछे प्रमुख कारण हो सकती हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल इस मामले पर राज्य सरकार की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने पहले ही जांच के आदेश दिए हैं और रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की बात कही थी।कोटा और बीकानेर की इन घटनाओं ने राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार इस मामले में क्या ठोस कदम उठाती है और पीड़ित परिवारों को न्याय कैसे मिलता है।