राजस्थान की वित्तीय स्थिति पर सियासी घमासान, वीडियो में जाने कर्ज और विकास खर्च को लेकर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार को घेरा
राजस्थान की वित्तीय स्थिति और विकास कार्यों पर खर्च को लेकर राज्य में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि राज्य की आर्थिक स्थिति चिंताजनक होती जा रही है और सरकार को इस पर श्वेत पत्र जारी करना चाहिए, ताकि जनता को वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सके।टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ने विकास कार्यों पर खर्च कम कर दिया है और राज्य को कर्ज के बोझ तले धकेल दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने प्रदेश में विकास की रफ्तार को प्रभावित किया है और वित्तीय प्रबंधन पूरी तरह से सवालों के घेरे में है।
उन्होंने कहा कि विधानसभा में वे लगातार जिस आर्थिक स्थिति की बात उठाते रहे हैं, उस पर अब नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट ने भी मुहर लगा दी है। उनके अनुसार, यह रिपोर्ट सरकार के वित्तीय प्रबंधन की वास्तविक स्थिति को उजागर करती है और कई दावों पर सवाल खड़े करती है।नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पिछले कुछ समय से “पांच साल बनाम दो साल” की तुलना को लेकर जो राजनीतिक माहौल बनाया जा रहा था, वह अब जनता के सामने पूरी तरह स्पष्ट हो चुका है। उन्होंने दावा किया कि यह तुलना केवल राजनीतिक प्रचार का हिस्सा थी, जबकि वास्तविकता इससे अलग है।
जूली ने आगे कहा कि राजस्थान आज विकास के मामले में नहीं, बल्कि कर्ज लेने के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होता जा रहा है। उनके अनुसार, लगातार बढ़ता कर्ज भविष्य की आर्थिक स्थिरता के लिए खतरे का संकेत है।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कैग की ताजा रिपोर्ट सरकार की वित्तीय नीतियों और खर्च प्रबंधन की खामियों को उजागर करती है। उनके अनुसार, विकास कार्यों में पारदर्शिता और प्राथमिकता दोनों ही प्रभावित हो रही हैं।
इस पूरे मामले पर अभी राज्य सरकार की ओर से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी बहस और तेज हो सकती है। कुल मिलाकर, राजस्थान की आर्थिक स्थिति को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ता दिख रहा है, और CAG रिपोर्ट के बाद यह मुद्दा राजनीतिक रूप से और अधिक गरमाने की संभावना है।