जयपुर में पांडुलिपि प्रदर्शनी और 21 दिवसीय लिपि प्रशिक्षण कार्यशाला की शुरुआत, वीडियो में देंखे उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने किया उद्घाटन
राजस्थान की प्राचीन ज्ञान परंपरा, वैदिक विरासत और दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत जयपुर में सोमवार से पांडुलिपि प्रदर्शनी और 21 दिवसीय लिपि प्रशिक्षण कार्यशाला की शुरुआत हुई। इस आयोजन का उद्देश्य प्राचीन भारतीय ज्ञान को संरक्षित करना और नई पीढ़ी को पारंपरिक लिपियों से जोड़ना है।यह विशेष कार्यक्रम राजस्थान संस्कृत अकादमी और वैदिक हेरिटेज एवं पांडुलिपि शोध संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। उद्घाटन समारोह में उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया और प्रदर्शनी का विधिवत उद्घाटन किया।
उद्घाटन के बाद उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और वहां रखी गई दुर्लभ चीन पांडुलिपियों को विस्तार से देखा। इस दौरान उन्होंने पांडुलिपियों के डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया को भी समझा और विशेषज्ञों से इसकी तकनीकी जानकारी ली।इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह पहल भारतीय ज्ञान-संपदा के संरक्षण की दिशा में एक दूरदर्शी और महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि राजस्थान केवल अपने भव्य किलों, महलों और स्थापत्य धरोहरों के लिए ही नहीं जाना जाता, बल्कि यह अपनी समृद्ध बौद्धिक, सांस्कृतिक और वैदिक परंपरा के लिए भी विश्वभर में अपनी विशेष पहचान रखता है।
कार्यशाला के माध्यम से प्रतिभागियों को प्राचीन लिपियों को पढ़ने, समझने और संरक्षित करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रयास उन दुर्लभ ग्रंथों और पांडुलिपियों को संरक्षित करने में मदद करेगा, जो समय के साथ नष्ट होने के कगार पर हैं।आयोजकों के अनुसार इस 21 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों को विशेष रूप से शामिल किया गया है। उन्हें वैदिक ग्रंथों, संस्कृत पांडुलिपियों और प्राचीन लेखन परंपराओं की जानकारी दी जाएगी। इस पहल को राजस्थान में सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे न केवल विरासत का संरक्षण होगा, बल्कि युवाओं में भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी।