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राज्य सरकार का बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, वीडियो में देखें सभी 41 जिलों के प्रभारी सचिव बदले, कई वरिष्ठ IAS को नई जिम्मेदारी

 

राज्य सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फैसला लेते हुए प्रदेश के सभी 41 जिलों के प्रभारी सचिव बदल दिए हैं। इस व्यापक फेरबदल के तहत कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को नए जिलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सरकार के इस कदम को प्रशासनिक कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। कार्मिक विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं।

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जारी आदेशों के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव गायत्री ए. राठौड़ को जयपुर जिले का प्रभारी सचिव नियुक्त किया गया है। वहीं महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव भवानी सिंह देथा को जोधपुर जिले की जिम्मेदारी दी गई है। दोनों ही जिले प्रशासनिक और राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं, ऐसे में इन नियुक्तियों को खास माना जा रहा है।

खान विभाग के प्रमुख सचिव टी. रविकांत को उदयपुर जिले का प्रभारी सचिव बनाया गया है। वहीं खेल एवं युवा मामलों के सचिव नीरज के. पवन को अजमेर जिले का प्रभारी सचिव नियुक्त किया गया है। अजमेर धार्मिक और पर्यटन के लिहाज से अहम जिला है, ऐसे में यहां प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इसके अलावा सहकारिता रजिस्ट्रार आनंदी को भरतपुर जिले का प्रभारी सचिव बनाया गया है। वहीं नगरीय विकास एवं आवासन विभाग (यूडीएच) के प्रमुख सचिव देवाशीष पृष्टि को बीकानेर जिले की जिम्मेदारी दी गई है। बीकानेर सीमावर्ती जिला होने के साथ-साथ प्रशासनिक दृष्टि से भी संवेदनशील माना जाता है।

इस फेरबदल की खास बात यह रही कि दो ऐसे आईएएस अधिकारियों को भी प्रभारी सचिव की जिम्मेदारी दी गई है, जो फिलहाल एपीओ (Awaiting Posting Orders) चल रहे थे। एपीओ चल रहे वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पीसी किशन को दौसा जिले का प्रभारी सचिव नियुक्त किया गया है, जबकि खजान सिंह को सलूंबर जिले का प्रभारी सचिव बनाया गया है। माना जा रहा है कि इन नियुक्तियों के जरिए सरकार ने इन अधिकारियों को दोबारा प्रशासनिक मुख्यधारा में लाने का संकेत दिया है।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, प्रभारी सचिवों का मुख्य दायित्व जिले में सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों की निगरानी करना, जिला प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करना और सरकार की प्राथमिकताओं को जमीनी स्तर पर लागू कराना होता है। ऐसे में सभी जिलों के प्रभारी सचिवों में एक साथ बदलाव को बड़ा निर्णय माना जा रहा है।

सरकार का मानना है कि इस बदलाव से जिलों में प्रशासनिक पकड़ मजबूत होगी और योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी। खासकर बजट घोषणाओं, विकास कार्यों और फ्लैगशिप योजनाओं की मॉनिटरिंग में प्रभारी सचिवों की भूमिका अहम होती है।

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस फेरबदल को आगामी समय में सरकार की सक्रियता और जिलों पर सीधी निगरानी बढ़ाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में और भी प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।