×

381 करोड़ के पेमेंट के चक्कर में फंसे महेश जोशी, वीडियो में जानें जल जीवन मिशन घोटाले में हुए नये खुलासे

 

राजस्थान में जल जीवन मिशन (जेजेएम) घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, नए खुलासे सामने आ रहे हैं। पिछली सरकार के कार्यकाल में हुए 980 करोड़ रुपए के इस घोटाले के बाद अब और भी ठेकेदारों और अधिकारियों के बीच हुए संदिग्ध लेन-देन की परतें उधड़ने लगी हैं।

<a href=https://youtube.com/embed/Zfu9doyvsNs?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/Zfu9doyvsNs/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden"" style="border: 0px; overflow: hidden;" width="640">

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। ईडी का आरोप है कि जेजेएम योजना के तहत ठेकेदारों से अधिकारियों और दलालों के जरिए करोड़ों रुपए का अवैध कमीशन वसूला गया। इस घोटाले में अब तक कई बड़े नाम भी जांच के घेरे में आ चुके हैं।

ताजा घटनाक्रम में ईडी ने करीब 381 करोड़ रुपए के भुगतान से जुड़े दस्तावेज बरामद किए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, ये दस्तावेज बेहद अहम माने जा रहे हैं, क्योंकि इनमें सरकारी अधिकारियों द्वारा दी गई स्वीकृतियों और लेन-देन के सबूत दर्ज हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि कैसे भुगतान के आदेश जल्दी पास करवाने के लिए तय राशि के अनुसार घूस ली जाती थी।

ईडी सूत्रों के मुताबिक, जिन ठेकेदारों ने इस घोटाले में लाभ उठाया, उनसे 10 से 15 प्रतिशत तक का कमीशन लिया गया। इस पूरी प्रक्रिया में एक संगठित गिरोह की तरह काम किया गया, जिसमें दलालों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। जल जीवन मिशन, जिसका मकसद ग्रामीण इलाकों में हर घर जल पहुंचाना था, उसमें इस तरह की धांधली से सरकार की छवि को गहरा आघात पहुंचा है।

जांच एजेंसी ने अब तक कई ठेकेदारों, बिचौलियों और कुछ वरिष्ठ अधिकारियों से पूछताछ की है। साथ ही, कई जगहों पर छापेमारी कर दस्तावेज और डिजिटल सबूत जुटाए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह जांच केवल 980 करोड़ तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे जेजेएम प्रोजेक्ट के तहत हुए सभी भुगतानों की गहन पड़ताल की जाएगी।

सूत्रों के अनुसार, ईडी जल्द ही कुछ और बड़ी गिरफ्तारियों कर सकती है। एजेंसी का कहना है कि जिन अधिकारियों ने इस गड़बड़ी में सक्रिय भूमिका निभाई, उनके खिलाफ भी मनी लॉन्ड्रिंग के तहत कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि जल जीवन मिशन केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है, जिसका लक्ष्य वर्ष 2024 तक देश के सभी ग्रामीण घरों में नल से जल की आपूर्ति सुनिश्चित करना है। लेकिन राजस्थान में इस योजना के क्रियान्वयन में भ्रष्टाचार के आरोप लगने से मिशन की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।

राज्य सरकार ने फिलहाल इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन विपक्षी दलों ने इस घोटाले को लेकर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। राजस्थान की राजनीति में जल जीवन मिशन घोटाला एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है, जिसका असर आने वाले समय में दिखाई दे सकता है।

ईडी की टीम फिलहाल सभी दस्तावेजों का विश्लेषण कर रही है और लेन-देन के हर पहलू को खंगालने में जुटी है। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है।