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विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान जोरदार हंगामा, वीडियो में जाने कांग्रेस-विधायकों और जलदाय मंत्री में टकराव

 

राजस्थान विधानसभा में आज के प्रश्नकाल के दौरान हंगामा देखने को मिला। कांग्रेस विधायक रुपिंदर कुनर ने जेजेएम योजना के तहत ढाणियों के लोगों को पानी कनेक्शन देने को लेकर पूरक सवाल उठाया। इसी सवाल के जवाब में जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी ने कहा कि नहरी क्षेत्रों में पंजाब से गंदा पानी आने की समस्या रहती है, जिसमें हेवी मेटल भी पाए जाते हैं। कांग्रेस विधायकों ने मंत्री के जवाब पर तुरंत सीधा और स्पष्ट उत्तर देने की मांग की। इस पर जलदाय मंत्री नाराज हो गए और उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम आते ही क्यों उछलते हो? उनके नाम से इतनी जलन क्यों मचती है? उन्होंने अच्छा काम किया है, तो उसकी चर्चा होगी।” मंत्री की इस टिप्पणी के बाद विधानसभा का माहौल और गर्म हो गया।

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बीच में लगातार टोकने और हंगामा बढ़ने पर स्पीकर ने कांग्रेस विधायकों को फटकार लगाई। स्पीकर ने कहा कि सदस्य आपसी बहस में संयम बनाए रखें और नियमों का पालन करें। इसके बावजूद विपक्ष और मंत्री के बीच तीखी बहस जारी रही। विशेषज्ञों का मानना है कि जेजेएम योजना जैसे सामाजिक और जल वितरण से जुड़े मुद्दों पर विधायक और मंत्री के बीच यह बहस आम है। विपक्ष द्वारा किए गए सवालों का उद्देश्य नीति और क्रियान्वयन में पारदर्शिता लाना होता है। वहीं, मंत्री का रुख इस बात को लेकर रहा कि सरकार की उपलब्धियों और केंद्रीय नेतृत्व के कार्यों को भी विधानसभा में मान्यता दी जाए।

कांग्रेस विधायकों ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल लोगों को पानी कनेक्शन के मुद्दे पर जानकारी लेना है और किसी राजनीतिक बहस को भड़काना नहीं। वहीं, मंत्री कन्हैयालाल चौधरी का कहना था कि प्रधानमंत्री मोदी के अच्छे कार्यों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। विधानसभा में इस हंगामे के दौरान कई अन्य सदस्य भी बीच-बिच में शामिल हुए, लेकिन स्पीकर की कड़ी फटकार और हिदायतों के बाद माहौल कुछ हद तक शांत हुआ। बावजूद इसके विपक्ष और सरकार के बीच सत्तापक्ष-विपक्ष टकराव के संकेत पूरे प्रश्नकाल में दिखाई दिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम राज्य की राजनीति और जनता के सामने नीति और विकास कार्यक्रमों की पारदर्शिता को उजागर करने का अवसर भी है। जेजेएम योजना जैसे मुद्दे सीधे ग्रामीण और ढाणी क्षेत्रों के लोगों की जीवनशैली और जल संकट से जुड़े हैं, इसलिए उनका विधानसभा में उठना स्वाभाविक है। इस हंगामे ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि विधानसभा में सवाल-जवाब के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच बहस और टकराव आम है, लेकिन इसे संयम और नियमों के तहत नियंत्रित करना भी जरूरी है।